Haldwani: यूजीसी के नए नियमों, शिक्षा एवं सरकारी सेवाओं में जाति आधारित आरक्षण और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर हल्द्वानी में विरोध और बदलाव की मांग सामने आई है। इस संबंध में नागरिकों, युवाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच संवाद और विचार-विमर्श की बात कही गई है। इन मुद्दों पर 22 अक्टूबर को हल्द्वानी के हीरानगर स्थित लगन गार्डन में बैठक आयोजित की जाएगी।
बैठक में शिक्षा, रोजगार और न्याय व्यवस्था से जुड़ी नीतियों पर संवैधानिक दायरे में चर्चा किए जाने की बात कही गई है। आयोजकों का कहना है कि नीतियों के निर्धारण में योग्यता, पारदर्शिता, समान अवसर, सामाजिक न्याय और प्रत्येक नागरिक की गरिमा को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
बैठक में यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी। इसके साथ ही उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की शिकायतों के निष्पक्ष निस्तारण, संस्थागत जवाबदेही तथा सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर देने जैसे विषयों पर भी चर्चा की जाएगी।
शिक्षा और सरकारी सेवाओं में जाति आधारित आरक्षण को समाप्त करने की मांग भी बैठक के प्रमुख एजेंडों में शामिल है। इसके विकल्प के रूप में आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से वंचित लोगों को सहायता उपलब्ध कराने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने, छात्रवृत्ति प्रदान करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
इसके अलावा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को समाप्त करने की मांग पर भी विचार रखे जाएंगे। इस विषय पर आयोजकों ने पीड़ितों की सुरक्षा, निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया और निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
आपराधिक शिकायतों के मामलों में निष्पक्ष एवं तथ्य-आधारित जांच, शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा और दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई को भी चर्चा का हिस्सा बनाया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और सभी मामलों में कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्रकाश हर्बोला ने कहा कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में सभी युवाओं को समान अवसर मिलने चाहिए। यूजीसी के नए नियमों, जातिगत आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट को समाप्त करने की मांग पर खुली चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से वंचित लोगों को सहायता देने तथा नीति निर्माण में युवाओं की आवाज को महत्व देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि 22 अक्टूबर को लगन गार्डन, हीरानगर में आयोजित बैठक में इन विषयों पर विचार रखे जाएंगे।
लक्ष्मण सिंह लमगड़िया ने कहा कि कानूनी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो वास्तविक पीड़ितों को सुरक्षा और न्याय प्रदान करे तथा किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न होने दे। उन्होंने कहा कि संबंधित कानूनों में बदलाव और उन्हें समाप्त करने की मांग पर संवैधानिक दायरे में चर्चा की जाएगी। साथ ही सामाजिक सद्भाव बनाए रखते हुए सभी वर्गों के विचार सुनना आवश्यक है।
पूर्व उपाध्यक्ष, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, पूरन सिंह रावत ने कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है, लेकिन उनके अनुसार राजनीतिक दलों ने वोट की राजनीति के चलते विभिन्न संशोधनों के माध्यम से जाति और धर्म के आधार पर विभाजन को बढ़ावा दिया है, जो देश की एकता और अखंडता के लिए घातक है। उन्होंने यूजीसी कानून की धारा 3C को संविधान के विरुद्ध बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की और कहा कि इस तरह के प्रावधानों से समाज में आपसी वैमनस्य बढ़ने की आशंका है।
बैठक में पूरन सिंह रावत, भगवान चंद्र पंत, सत्येंद्र तोमर, योगेंद्र बिष्ट और भुवन चंद्र भट्ट सहित अन्य लोगों के शामिल रहने की जानकारी दी गई है। बैठक में संबंधित नीतियों और कानूनों पर चर्चा के साथ अपनी मांगों को सामने रखने की बात कही गई है।

Chief Editor, Aaj Khabar
