Uttarakhand: भू-वैकुंठ नगरी भगवान श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी के पावन अवसर पर विधि-विधान के साथ घोषित कर दी गई। इस वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर 2026 को रात 9 बजकर 37 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसके साथ ही उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा का भी औपचारिक समापन हो जाएगा।
विजयादशमी के अवसर पर बदरीनाथ मंदिर परिसर में भव्य धार्मिक समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान हक-हकूकधारी तीर्थ पुरोहितों की मौजूदगी में मुख्य पुजारी रावल अमरनाथ नंबूदरी और धर्माधिकारी ने भगवान बदरी विशाल को विशेष भोग अर्पित करने तथा पंचांग गणना के बाद कपाट बंद होने के शुभ मुहूर्त की घोषणा की।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट कर्क लग्न के वर्गोत्तम नवमांश के अत्यंत शुभ संयोग में बंद किए जाएंगे। विजयादशमी के अवसर पर यमुनोत्री धाम, द्वितीय केदार मध्यमहेश्वर धाम और तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथियां भी घोषित की गईं। वहीं, केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने का मुहूर्त ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में निकाला गया।
बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने से पहले पांच दिवसीय पारंपरिक पंच पूजाओं का आयोजन किया जाएगा। यह धार्मिक अनुष्ठान 12 नवंबर से शुरू होकर 16 नवंबर तक चलेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 12 नवंबर को भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इसी दिन शाम को गणेश मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
13 नवंबर को आदि केदारेश्वर मंदिर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट धार्मिक परंपराओं के अनुसार बंद किए जाएंगे। 14 नवंबर को बदरीनाथ धाम के गर्भगृह में वेद ऋचाओं और खड्ग पुस्तक के वाचन की परंपरा को विराम दिया जाएगा।
15 नवंबर को माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद मुख्य रावल लक्ष्मी मंदिर पहुंचकर माता लक्ष्मी को भगवान नारायण के साथ मुख्य गर्भगृह में विराजमान होने का निमंत्रण देंगे। 16 नवंबर को माता लक्ष्मी को भगवान विष्णु के समीप मुख्य गर्भगृह में विराजमान कराया जाएगा। इसके बाद रात 9 बजकर 37 मिनट पर भगवान बदरी विशाल के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
कपाट बंद होने के अगले दिन, 17 नवंबर को भगवान बदरी विशाल के प्रतिनिधि एवं बालसखा उद्धव जी, देवताओं के खजांची कुबेर जी और भगवान के वाहन गरुड़ जी के साथ आदि गुरु शंकराचार्य की पावन गद्दी डोली शीतकालीन प्रवास के लिए प्रस्थान करेगी। देव डोलियां सागर और पांडुकेश्वर होते हुए नृसिंह मंदिर, ज्योतिर्मठ पहुंचेंगी। यहां आगामी छह महीनों तक भगवान की शीतकालीन पूजा-अर्चना और दर्शन संपन्न होंगे।
इस तरह विजयादशमी के पावन अवसर पर कपाट बंद होने की तिथि घोषित होने के साथ ही बदरीनाथ धाम में शीतकालीन पूजा की तैयारियों का कार्यक्रम भी निर्धारित हो गया है।
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Chief Editor, Aaj Khabar
