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New Delhi: एसबीआई के 3,897 ग्राहकों का निजी डेटा लीक, डार्क वेब पर पहुंची संवेदनशील जानकारियां

New Delhi: एसबीआई के 3,897 ग्राहकों का निजी डेटा लीक, डार्क वेब पर पहुंची संवेदनशील जानकारियां
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New Delhi: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) से जुड़ा डेटा लीक का गंभीर मामला सामने आया है। बैंक के 3,897 ग्राहकों की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारियां डार्क वेब पर लीक होने की पुष्टि हुई है। बैंक ने बुधवार, 21 अक्टूबर को शेयर बाजार को दी गई आधिकारिक जानकारी में इस घटना की पुष्टि की। हालांकि, बैंक ने स्पष्ट किया है कि इस घटना का उसके बैंकिंग परिचालन और ग्राहकों के लेन-देन पर कोई असर नहीं पड़ा है।

इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब सुरक्षा एजेंसियों ने एसबीआई को संभावित डेटा लीक को लेकर अलर्ट किया। बैंक को डिफेंस साइबर एजेंसी, अपने थ्रेट इंटेलिजेंस सेवा प्रदाता और भारत की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसी सर्ट-इन (CERT-In) से इस संबंध में खुफिया जानकारी मिली थी। अलर्ट में बताया गया था कि डार्क वेब पर एसबीआई के ग्राहकों से जुड़ा संवेदनशील डेटा उपलब्ध होने की आशंका है।

साइबर अपराधों पर नजर रखने वाले सोशल मीडिया अकाउंट ‘साइबरपल्स56’ ने भी इस सप्ताह की शुरुआत में एक्स पर एक पोस्ट के जरिए मामले की जानकारी साझा की थी। पोस्ट के अनुसार, ‘सीरियसइम’ नाम के एक अज्ञात हैकर समूह ने एसबीआई के ग्राहकों से संबंधित करीब 3.75 लाख डेटा एंट्री और 2,722 से अधिक पीडीएफ दस्तावेज होने का दावा किया था।

हैकर्स के दावे के बाद बैंक ने मामले की जांच शुरू की। शुरुआती जांच में कथित तौर पर उपलब्ध 3.75 लाख रिकॉर्ड में से 3,897 रिकॉर्ड वास्तविक पाए गए। इनमें ग्राहकों की व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां शामिल थीं।

लीक हुए डेटा में ग्राहकों के नाम, लिंग, पंजीकृत मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, जन्मतिथि और आवासीय पते जैसी जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इसके अलावा, बैंक शाखा और सीआईएफ कोड से संबंधित विवरण तथा ऋण आवेदनों और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों के भी लीक होने की जानकारी सामने आई है। ऐसी जानकारियों का दुरुपयोग कर साइबर अपराधी ग्राहकों को फर्जी कॉल, संदेश और ईमेल के जरिए निशाना बना सकते हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसबीआई ने अपने साइबर सुरक्षा संबंधी प्रतिक्रिया और बचाव प्रोटोकॉल लागू कर दिए हैं। बैंक ने डेटा लीक के कारणों का पता लगाने और सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को भी नियुक्त किया है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि संवेदनशील जानकारियां किस माध्यम से लीक हुईं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन अतिरिक्त उपायों की आवश्यकता है।

बैंक ने कहा है कि डेटा लीक की घटना से उसके मुख्य बैंकिंग परिचालन, रोजमर्रा की सेवाओं और ग्राहकों के वित्तीय लेन-देन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। हालांकि, व्यक्तिगत जानकारी लीक होने के कारण ग्राहकों को सतर्क रहने की जरूरत है। ग्राहकों को किसी भी अनजान कॉल, संदिग्ध लिंक या बैंक अधिकारी बनकर जानकारी मांगने वाले संदेशों से सावधान रहना चाहिए। किसी के साथ ओटीपी, पिन या पासवर्ड साझा नहीं करना चाहिए।

इस घटनाक्रम के बीच बुधवार सुबह शेयर बाजार में एसबीआई के शेयर करीब 970 रुपये के आसपास कारोबार करते नजर आए। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में बैंक के शेयर में लगभग 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान शेयर का 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 1,234.80 रुपये और न्यूनतम स्तर 891.55 रुपये रहा।

फिलहाल, डेटा लीक के कारणों की विस्तृत जांच जारी है। बैंक की ओर से परिचालन सामान्य रहने की बात कही गई है, लेकिन ग्राहकों की निजी जानकारियों की सुरक्षा और संभावित दुरुपयोग को रोकना इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।

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