New Delhi/Dehradun: उत्तराखंड पंचायत चुनावों में कथित वोटर हेरफेर के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य चुनाव आयोग पर ₹2 लाख का जुर्माना लगा दिया। अदालत ने कहा कि आयोग ने न सिर्फ हाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है, बल्कि लोकतंत्र की मूल भावना के साथ खिलवाड़ भी किया है।
जनवरी 2025 में शहरी निकाय चुनावों के लिए वोटर लिस्ट में बदलाव किया गया था। आरोप है कि भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं को गांव से हटाकर शहरों की वोटर लिस्ट में शामिल कराया, ताकि वे फर्जी वोटिंग कर सकें। इसके बाद पंचायत चुनावों के दौरान इन कार्यकर्ताओं को वापस गांव की वोटर लिस्ट में जोड़ा गया, जिससे कई लोगों के नाम दोहरी वोटर लिस्ट में दर्ज हो गए।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा ने इस पर आपत्ति जताते हुए चुनाव आयोग को चेताया था कि कम से कम 6 महीने का निवास जरूरी है और दो जगह नाम होना कानून का उल्लंघन है। इसके बावजूद आयोग ने आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए ऐसे उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी।
मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने साफ निर्देश दिए कि दोहरी वोटर लिस्ट वाले उम्मीदवारों का नामांकन रद्द किया जाए। लेकिन राज्य चुनाव आयोग ने आदेश का पालन नहीं किया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए आयोग पर जुर्माना लगाया और कहा कि यह लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है।
विपक्षी दलों ने इस पूरे घटनाक्रम को ‘वोट चोरी’ करार दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विपक्ष का आरोप और मजबूत हो गया है तथा मामले पर संवैधानिक मुहर लग गई है।

Chief Editor, Aaj Khabar
