Dehradun: उत्तराखंड में पंचायत चुनावों को लेकर उठे वोट चोरी के मामले पर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। अदालत ने शुक्रवार को उत्तराखंड राज्य चुनाव आयोग पर ₹2 लाख का जुर्माना लगाया। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करने पर की गई है।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पहले शहरी निकाय चुनाव में अपने समर्थकों के नाम गांव से शहर की वोटर लिस्ट में शिफ्ट करवाए और चुनाव पूरा होते ही उन्हें दोबारा गांव की सूची में जोड़ने का प्रयास किया। कांग्रेस ने इस पर कड़ा विरोध जताया और चुनाव आयोग को लगातार शिकायतें भेजीं।
यशपाल आर्य के मुताबिक, छह महीने से कम समय में वोटर लिस्ट में नाम शिफ्ट करना नियमों के खिलाफ है, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं ने दूसरी जगह नया नाम जुड़वाकर दोहरी वोटर पहचान बना ली। जब इन लोगों को टिकट मिला तो कांग्रेस ने चुनाव आयोग से ऐसे उम्मीदवारों का नॉमिनेशन रद्द करने की मांग की, लेकिन आयोग ने कार्रवाई से इनकार कर दिया।
मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो अदालत ने साफ निर्देश दिए कि उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम 2016 की धारा 9(6) और 9(7) के तहत दो जगह वोटर रहने वाले उम्मीदवारों के नामांकन रद्द किए जाएं। इसके बावजूद चुनाव आयोग ने आदेश मानने से इनकार कर दिया और उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी।
इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया और जुर्माना लगाया। यशपाल आर्य ने कहा कि यह फैसला साबित करता है कि भाजपा ने सत्ता में बने रहने के लिए वोट चोरी की साजिश रची और चुनाव आयोग ने भी नियमों की अनदेखी की।

Chief Editor, Aaj Khabar
