Dehradun: एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) रोकने की मांग को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने विपक्ष के आंदोलन को संवैधानिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास जीतने में असफल लोगों की हताशा करार दिया।
महेंद्र भट्ट ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी चुनावी हार की खामियों पर आत्ममंथन करने के बजाय पूरी चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने कहा कि बिना वैध दस्तावेजों के लोगों को मतदाता बनाने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।
उन्होंने एसआईआर रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर प्रस्तावित विपक्षी आंदोलन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसका विरोध क्यों कर रहे हैं। क्या विपक्ष नहीं चाहता कि उत्तराखंड में मतदाताओं की शुद्ध सूची तैयार हो? क्या वह अवैध रूप से रह रहे लोगों के मतदाता बनने का समर्थन करता है? उन्होंने कहा कि यदि कोई राज्य की जनसांख्यिकी में बदलाव की कोशिशों का समर्थन करता है तो यह गंभीर विषय है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस के पुराने राजनीतिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए उस पर चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रभावित करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर नियम बनाए और लंबे समय से लंबित संवैधानिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
महेंद्र भट्ट ने दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने के बाद कांग्रेस और विपक्षी दलों को अपनी राजनीतिक जमीन कमजोर होती दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कारण विपक्ष चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर नकारात्मक राजनीति कर रहा है।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका, कार्यपालिका, पत्रकारिता, चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर हमले करने वालों को जनता पहचान चुकी है। भट्ट ने दावा किया कि विपक्ष के आरोपों का जनता पर असर नहीं पड़ेगा और 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को फिर हार का सामना करना पड़ेगा।
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Chief Editor, Aaj Khabar
