Dehradun: उत्तराखंड में NEET UG 2026 की काउंसलिंग प्रक्रिया में आरक्षित वर्गों की सीटों के आवंटन को लेकर सामने आई शिकायतों पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
यशपाल आर्य ने कहा कि यदि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, EWS समेत अन्य आरक्षित श्रेणियों का लाभ ऐसे अभ्यर्थियों को मिला है, जो निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करते, तो यह वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि मामले में केवल कर्मचारियों पर कार्रवाई तक सीमित न रहते हुए पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
उन्होंने HNBUMU देहरादून द्वारा संचालित NEET UG काउंसलिंग के प्रथम चरण की सूची का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ अभ्यर्थियों को आरक्षित श्रेणी की सीट आवंटित किए जाने को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। शिकायत के अनुसार सूची में क्रम संख्या 684 पर दिपांशु और 745 पर कुसुम मल को अनुसूचित जाति श्रेणी में सीट आवंटित की गई, जबकि उन्हें सामान्य श्रेणी से संबंधित बताया गया है।
इसी तरह क्रम संख्या 820 पर प्रियांशु गुप्ता और 825 पर हर्षित को अनुसूचित जाति श्रेणी की सीट मिलने का उल्लेख है, जबकि शिकायत के अनुसार दोनों OBC श्रेणी से संबंधित हैं। क्रम संख्या 951 पर चित्रा को सामान्य EWS श्रेणी का बताया गया है, लेकिन उन्हें भी अनुसूचित जाति श्रेणी में सीट आवंटित किए जाने का आरोप है।
यशपाल आर्य ने कहा कि इन पांच मामलों समेत ऐसे सभी मामलों की जांच आवश्यक है। किसी अभ्यर्थी ने गलत तरीके से आरक्षित श्रेणी या डोमिसाइल का लाभ लिया है या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण मूल जाति प्रमाणपत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र और अन्य संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने राउंड 1 और राउंड 2 के बाद जारी प्रोविजनल सूची में प्रवेश और फ्लोट स्थिति के साथ श्रेणी एवं डोमिसाइल प्रमाणपत्रों के सत्यापन की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों से आए किसी अभ्यर्थी को केवल उसके राज्य से बाहर का होने के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता, लेकिन यदि किसी ने उत्तराखंड के आरक्षण या डोमिसाइल का लाभ लिया है तो उसकी पात्रता और प्रमाणपत्रों की वैधानिकता का सत्यापन जरूरी है।
नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि राउंड 1 और राउंड 2 में आरक्षित श्रेणी अथवा डोमिसाइल के आधार पर सीट पाने वाले सभी अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का भौतिक और डिजिटल सत्यापन कराया जाए। संदिग्ध प्रमाणपत्रों को संबंधित जिलाधिकारी या सक्षम प्राधिकारी से सत्यापित कराने, गलत प्रमाणपत्र मिलने पर प्रवेश नियमानुसार निरस्त करने और कानून के तहत कार्रवाई करने की मांग भी की गई।
इसके अलावा HNBUMU और काउंसलिंग प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच, जानबूझकर अनियमितता मिलने पर कार्रवाई, शिकायतों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच और जांच की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
यशपाल आर्य ने कहा कि प्रमाणपत्र सत्यापन की प्रक्रिया पूरी किए बिना अगली काउंसलिंग आगे बढ़ाने से पहले सरकार को पूरे मामले पर स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा में प्रवेश जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि अब तक किन अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है और यदि पूर्व वर्षों में भी ऐसी शिकायतें सामने आई हैं तो पिछली काउंसलिंग के रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में क्यों नहीं लाया जा रहा है।
यशपाल आर्य ने कहा कि सरकार को निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदारी तय करनी होगी और पात्र अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
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Chief Editor, Aaj Khabar
