New Delhi: सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी में दिल्ली की तिहाड़ जेलों को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। समाजसेवी एवं आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया द्वारा दाखिल आरटीआई के जवाब में कारागार मुख्यालय ने बताया कि दिल्ली की जेलें वर्षों से अपनी क्षमता से लगभग दोगुने कैदियों के दबाव में चल रही हैं। वहीं कई महत्वपूर्ण सवालों पर विभाग ने स्पष्ट जानकारी देने के बजाय आवेदन को अन्य अधिकारियों के पास भेज दिया या रिकॉर्ड उपलब्ध न होने की बात कही है।
आरटीआई में मांगी गई जानकारी के अनुसार दिल्ली की सभी जेलों की कुल क्षमता 10,026 कैदियों की है, लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है। विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक 31 दिसंबर 2024 तक दिल्ली की जेलों में कुल 19,512 कैदी बंद थे, जो निर्धारित क्षमता से 9,486 अधिक हैं।
इसी प्रकार 31 दिसंबर 2023 तक जेलों में 20,077 कैदी बंद थे, जो क्षमता से 10,051 अधिक थे। 31 दिसंबर 2022 तक कुल 18,497 कैदी जेलों में बंद पाए गए, जो क्षमता से 8,471 अधिक थे। 31 दिसंबर 2021 तक 18,295 कैदी बंद थे, जो क्षमता से 8,269 अधिक थे, जबकि 31 दिसंबर 2020 तक 15,995 कैदी जेलों में बंद थे, जो क्षमता से 5,969 अधिक थे। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दिल्ली की जेलें लंबे समय से निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक कैदियों के दबाव में संचालित हो रही हैं।
आरटीआई में यह भी पूछा गया था कि पिछले पांच वर्षों में जेलों के अंदर आपसी झगड़ों के दौरान कितने कैदियों की मौत हुई, कितनी आत्महत्याएं हुईं और बीमारी के कारण कितने कैदियों की मृत्यु हुई। इस पर कारागार मुख्यालय ने सीधे जानकारी देने के बजाय लिखा कि यह सूचना संबंधित जन सूचना अधिकारी अथवा कारागार अधीक्षक से संबंधित है और आवेदन को अग्रिम कार्रवाई के लिए उन्हें भेज दिया गया है।
इसके अलावा आरटीआई में पिछले पांच वर्षों के दौरान कैदियों को नाश्ता, लंच और डिनर में क्या-क्या भोजन दिया जाता है तथा इस पर कितना सरकारी धन खर्च हुआ, इसका पूरा विवरण मांगा गया था। इस प्रश्न के उत्तर में विभाग ने कहा कि इस प्रकार का कोई विशिष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। हजारों कैदियों के भोजन पर प्रतिदिन सरकारी धन खर्च होने के बावजूद रिकॉर्ड न होने का जवाब कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
आरटीआई में यह भी पूछा गया था कि पिछले पांच वर्षों में जेलों में बंद सबसे ज्यादा खूंखार कैदियों की संख्या कितनी है, उनके नाम क्या हैं और उनकी सुरक्षा के लिए क्या विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। इस प्रश्न पर भी विभाग ने वही जवाब देते हुए लिखा कि यह जानकारी संबंधित कारागार अधीक्षकों के पास उपलब्ध है और आवेदन उन्हें अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है।
इसके अलावा कैदियों के बीमार होने पर उनके इलाज पर कितना सरकारी धन खर्च किया गया, इसका पूरा विवरण भी मांगा गया था, लेकिन इस बिंदु पर भी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
आरटीआई के जवाब में सामने आए इन तथ्यों से यह साफ होता है कि दिल्ली की जेलों में कैदियों की संख्या लगातार क्षमता से कहीं अधिक बनी हुई है, जबकि कई महत्वपूर्ण सूचनाओं का रिकॉर्ड मुख्यालय स्तर पर उपलब्ध नहीं बताया जा रहा है। समाजसेवी एवं आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया ने कहा कि प्राप्त उत्तरों का अध्ययन किया जा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर प्रथम अपील सहित उच्च स्तर पर कार्रवाई की जाएगी, ताकि पूरी जानकारी सार्वजनिक हो सके और वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

Chief Editor, Aaj Khabar
