Almora: उत्तराखण्ड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मोहान (अल्मोड़ा) स्थित इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईएमपीसीएल) के निजीकरण को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि आईएमपीसीएल केवल एक सरकारी संस्था नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की आर्थिक, सामाजिक और आयुर्वेदिक पहचान का मजबूत स्तंभ रही है। वर्षों से यह संस्थान हजारों परिवारों की आजीविका का आधार बना हुआ है और देशभर में आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है।
यशपाल आर्य ने कहा कि 26 मई 2026 को डीआईपीएएम द्वारा आईएमपीसीएल को स्काई मैप फार्मा प्राइवेट लिमिटेड को बेचे जाने की घोषणा के बाद कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में गहरी चिंता और असंतोष का माहौल है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कर्मचारी संघ ने 18 मई को कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार से मिलने का समय मांगा था, तो उनकी बात क्यों नहीं सुनी गई।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आज संस्थान के स्थायी, संविदा और दैनिक श्रमिक अपने रोजगार, भविष्य और अधिकारों को लेकर चिंतित हैं। इसी कारण कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगते हुए पूछा कि क्या कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित रहेगी, वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के अधिकारों की क्या गारंटी होगी और निजीकरण के बाद उनके हितों की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
यशपाल आर्य ने यह भी पूछा कि क्या सरकार ने इस फैसले से पहले कर्मचारियों, स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों से कोई संवाद किया था। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखण्ड के युवाओं के रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था, आयुर्वेदिक विरासत और हजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस आईएमपीसीएल कर्मचारियों की न्यायसंगत मांगों के साथ मजबूती से खड़ी है और सरकार से मांग करती है कि कर्मचारी संघ को तत्काल वार्ता का समय दिया जाए। साथ ही कर्मचारियों के हितों, रोजगार सुरक्षा और संस्थान के भविष्य को लेकर स्पष्ट आश्वासन दिया जाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और कर्मचारियों का सम्मान, रोजगार की सुरक्षा तथा प्रदेश की अस्मिता सर्वोपरि है।

Chief Editor, Aaj Khabar
