Dehradun: उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की प्रस्तावित कोर कमेटी बैठक से पहले इंटरनल सर्वे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत कराए गए इस सर्वे में विधायकों का मूल्यांकन कई पैरामीटर पर किया गया है और उन्हें तीन अलग-अलग जोन में वर्गीकृत किया गया है। रेड जोन में शामिल सीटों को लेकर सबसे अधिक चर्चा है, क्योंकि इन क्षेत्रों से पार्टी को कमजोर ग्राउंड फीडबैक मिलने की बात सामने आ रही है। ऐसे में संबंधित विधायकों के टिकट पर संकट की स्थिति बनती दिख रही है।
प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट किया है कि पार्टी का लक्ष्य चुनाव जीतना है और सभी मंत्री-विधायकों को अपनी-अपनी विधानसभा सीटों पर पूरी गंभीरता से फोकस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्वे पार्टी की नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा है और केंद्रीय नेतृत्व जीत की संभावनाओं के आधार पर अंतिम निर्णय लेता है।
दिलीप रावत ने कहा कि राजनीति शतरंज की तरह है और पार्टी जहां जिस नेता को उपयुक्त समझेगी, वहीं से चुनाव लड़ाएगी। वहीं विनोद चमोली का मानना है कि सीट बदलना समाधान नहीं है और विधायकों को अपनी मौजूदा सीट पर ही जनविश्वास मजबूत करना चाहिए।
दूसरी ओर विपक्ष ने भाजपा के इंटरनल सर्वे को घबराहट करार दिया है। प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं जता पा रही है, जबकि हरक सिंह रावत ने दावा किया कि कई भाजपा नेता सुरक्षित सीट की तलाश में हैं। कुल मिलाकर, कोर कमेटी बैठक से पहले यह सर्वे प्रदेश की राजनीति में नई बहस और संभावित रणनीतिक बदलावों का संकेत दे रहा है।

Chief Editor, Aaj Khabar
