॰ अंकिता भंडारी मामले में कथित VIP की नियुक्ति पर बवाल, कांग्रेस नेताओं ने लोकभवन के बाहर किया प्रदर्शन
Dehradun: अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति के केंद्र में आ गया है। मामले में कथित वीआईपी की राज्यपाल पद पर नियुक्ति को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने के विरोध में गुरुवार को उत्तराखंड कांग्रेस ने देहरादून में प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने लोकभवन पहुंचकर अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने और कथित वीआईपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। इस दौरान हंगामा बढ़ने पर पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, हरक सिंह रावत और प्रीतम सिंह समेत कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया।
प्रदर्शन से पहले कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने संयुक्त प्रेस वार्ता की। इसके बाद कांग्रेस नेता अचानक लोकभवन पहुंच गए और वहां नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि वे लोकभवन में ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, लेकिन उनका ज्ञापन लेने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। इसी दौरान हरक सिंह रावत ने आत्मदाह की धमकी भी दी।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। सरकार ने स्वयं इस मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति की थी, लेकिन इसके बावजूद कथित वीआईपी को राज्यपाल नियुक्त किए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्टी ने सरकार से इस फैसले पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रेस वार्ता में भाजपा पर अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही मामले में वीआईपी की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गोदियाल ने दावा किया कि भाजपा के एक मंत्री ने वीआईपी को व्यक्ति के बजाय कमरा बताया था, जबकि पार्टी के एक पूर्व विधायक ने कथित वीआईपी को लेकर खुलासे किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति को कानूनी संरक्षण देने की कोशिश की गई है। गोदियाल ने इसे उत्तराखंड के स्वाभिमान पर चोट बताते हुए कहा कि अंकिता को न्याय नहीं मिलने के कारण पूरे देश की नजरें उत्तराखंड पर टिकी हैं। उन्होंने मातृशक्ति से एकजुट होकर न्याय की लड़ाई में आगे आने की अपील भी की।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अंकिता भंडारी प्रकरण को उत्तराखंड की अस्मिता से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि अंकिता ने अपने सम्मान और गौरव की रक्षा के लिए अपनी जान गंवाई और अब यह सभी की जिम्मेदारी है कि मामले को न्यायिक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए। रावत ने कहा कि यह केवल अंकिता के परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का संघर्ष है।
हरीश रावत ने अंकिता के माता-पिता को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की निंदा करते हुए कहा कि परिवार लगातार पूछ रहा है कि कथित वीआईपी कौन था। उन्होंने सवाल उठाया कि सीबीआई जांच में कथित वीआईपी की भूमिका की पड़ताल होनी चाहिए। रावत ने कथित वीआईपी की राज्यपाल पद पर नियुक्ति को लेकर भी सवाल खड़े किए और इसे गंभीर मामला बताया।
कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने भी भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में भाजपा नेताओं की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं और अंकिता भंडारी हत्याकांड भी इसी कड़ी का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिसॉर्ट से साक्ष्य मिटाने की कोशिश की गई, ताकि कथित वीआईपी का नाम सामने न आ सके। प्रीतम सिंह ने कहा कि मामले की जांच की प्रगति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और कथित वीआईपी की पहचान सार्वजनिक कर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
वहीं, हरक सिंह रावत ने अंकिता के माता-पिता को इंडिया गेट पर हिरासत में लिए जाने को तानाशाही करार दिया। उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की गई। उन्होंने रिसॉर्ट में साक्ष्य मिटाए जाने और कथित वीआईपी से जुड़े नामों को लेकर भी सवाल उठाए। हरक सिंह रावत ने कहा कि अब अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई केवल कांग्रेस की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की बन चुकी है।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

Chief Editor, Aaj Khabar
