Dehradun: दुष्यंत गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल बनाए जाने के बाद उत्तराखंड में सियासी विवाद तेज हो गया है। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उन पर समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। इसी मामले को लेकर कांग्रेस ने उनकी राज्यपाल पद पर नियुक्ति का विरोध शुरू कर दिया है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों और उनकी कानूनी स्थिति के बीच अंतर करना जरूरी है।
मंगलवार को देहरादून के गांधी पार्क में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने गांधी प्रतिमा के सामने एक घंटे का मौन उपवास किया। कांग्रेस ने इसे कथित वीआईपी को संवैधानिक पद पर नियुक्त किए जाने के फैसले के विरोध में उठाया गया कदम बताया। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से इस नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। दुष्यंत गौतम इससे पहले उत्तराखंड में भाजपा के प्रदेश प्रभारी रह चुके हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने नियुक्ति का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने दुष्यंत गौतम को उत्तराखंड से दूसरे प्रदेश का राज्यपाल बनाकर भेज दिया है। उन्होंने इसे उत्तराखंड के जनमानस की भावनाओं का अपमान बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। गोदियाल के अनुसार, अंकिता भंडारी के माता-पिता संबंधित मामले में कानूनी कार्रवाई और जांच की मांग करते रहे हैं। ऐसे में जांच से जुड़े सवालों के बीच राज्यपाल पद पर नियुक्ति दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आगे के आंदोलन की रणनीति वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद तय करेगी।
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव संगठन राजेंद्र सिंह भंडारी ने भी इस फैसले की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि संवेदनशील मामले में इस तरह की नियुक्ति से गलत संदेश गया है। कांग्रेस का कहना है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सीबीआई जांच की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। पार्टी ने जांच की प्रगति सार्वजनिक करने की मांग भी की है।
वहीं, अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने दावा किया कि उनकी बेटी की हत्या में वीआईपी की मुख्य भूमिका थी। उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 में सरकार से सीबीआई जांच की मांग की गई थी। उनके अनुसार, 9 और 10 अक्टूबर 2026 को जांच शुरू होना सरकार की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने आशंका जताई कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जांच पूरी नहीं होगी। हालांकि, ये उनके आरोप और आशंकाएं हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
वीरेंद्र सिंह भंडारी ने सवाल उठाया कि जब पहले 47 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, तो उनसे दोबारा पूछताछ क्यों की जा रही है। उन्होंने उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर से पूछताछ, सुरेश राठौर का नार्को टेस्ट तथा कथित वीआईपी अजय कुमार और दुष्यंत कुमार के फोन की लोकेशन की जांच कराने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने यमकेश्वर विधायक रेणु बिष्ट के बयान दर्ज करने, वनंतरा रिसॉर्ट को तोड़े जाने के आदेशों की जांच करने और पुलकित आर्य की 18 से 23 सितंबर 2022 तक की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) निकलवाने की मांग भी उठाई।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस के विरोध और अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच से जुड़े सवालों ने उत्तराखंड की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब इस मामले में आगे की जांच और राजनीतिक दलों की आगामी रणनीति पर सबकी नजरें रहेंगी।

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Chief Editor, Aaj Khabar
