Dehradun: लंबे समय से चल रहे केदारनाथ धाम के गर्भगृह को स्वर्ण मंडित कराने के विवाद पर अब विराम लग गया है। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की जांच रिपोर्ट में किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने न तो सोना खरीदा और न ही कार्य अपने स्तर से कराया। समिति ने केवल शासन से मिले निर्देशों के अनुसार दानदाता दलीप लाखी को सहयोग प्रदान किया। यह भी सामने आया कि कार्य शुरू करने से पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) और सीबीआरआई रुड़की से अनुमति ली गई थी।
जांच के अनुसार, गर्भगृह को स्वर्ण मंडित करने में 23.77 किलोग्राम सोना और लगभग 1001 किलोग्राम तांबा लगा। बीकेटीसी ने इस सामग्री का उल्लेख अपने स्टॉक रजिस्टर में दर्ज किया है। पूरी प्रक्रिया दानदाता द्वारा अपने अधिकृत ज्वैलर्स से कराई गई और सुरक्षा के बीच प्लेटों को केदारनाथ पहुंचाकर गर्भगृह में स्थापित किया गया।
आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि बीकेटीसी पर लगे सभी आरोप निराधार हैं और कार्य शासन की स्वीकृति व निर्धारित प्रक्रिया के तहत संपन्न हुआ।

Chief Editor, Aaj Khabar
