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Haldwani: कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश का भाजपा सरकार पर हमला, सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने पर उठाए सवाल

Haldwani: कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश का भाजपा सरकार पर हमला, सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने पर उठाए सवाल
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Haldwani: हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर सरकारी जमीनों और परिसंपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जल, जंगल और जमीन प्रदेश की जनता की सामूहिक विरासत है और इसका इस्तेमाल चुनिंदा लोगों या कारोबारी समूहों को लाभ पहुंचाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

सुमित हृदयेश ने कहा कि उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) की वेबसाइट पर नैनीताल के पटवाडांगर में प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट, हरिद्वार के अलकनंदा होटल और ऋषिकेश PWD गेस्ट हाउस से संबंधित PPP परियोजनाओं की निविदाएं दर्ज हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि सरकारी संपत्तियों को लंबे समय के लिए निजी हाथों में देने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है और इससे प्रदेश की जनता को क्या लाभ मिलेगा।

विधायक ने आरोप लगाया कि सरकारी संसाधनों को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया के पीछे केवल विकास ही नहीं, बल्कि सरकार के करीबी लोगों और बड़े कारोबारी समूहों को लाभ पहुंचाने का उद्देश्य भी हो सकता है। उन्होंने सरकार से निविदाओं की शर्तों, संपत्तियों के मूल्यांकन और इन परियोजनाओं से होने वाले सार्वजनिक लाभ को स्पष्ट करने की मांग की।

सुमित हृदयेश ने जॉर्ज एवरेस्ट मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी निवेश से विकसित परिसंपत्तियों को निजी ऑपरेटर को 15 वर्षों के लिए दिए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। उन्होंने उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए 142 एकड़ भूमि के लीज पर दिए जाने और करीब एक करोड़ रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क का उल्लेख किया।

महानगर कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट गोविंद सिंह बिष्ट ने भी सरकारी संपत्तियों के निजी इस्तेमाल को लेकर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जमीन केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की पूंजी है। सरकार को प्रत्येक संपत्ति की नीलामी, लीज और PPP प्रक्रिया की पूरी जानकारी जनता के सामने रखनी चाहिए।

गोविंद सिंह बिष्ट ने कहा कि निविदाओं की शर्तें किसके हित में बनाई गई हैं और स्थानीय लोगों तथा कारोबारियों की भागीदारी कितनी सुनिश्चित की गई है, यह भी स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों का उपयोग जनहित, स्थानीय रोजगार और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए होना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी सरकारी संपत्तियों से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता की मांग को लेकर जनता के बीच जाएगी और जल, जंगल, जमीन तथा सार्वजनिक परिसंपत्तियों के संरक्षण का मुद्दा सड़क से सदन तक उठाती रहेगी।

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