॰ डायरी में लिखे एक शब्द ने खोला 10 साल पुराने बिछड़ाव का राज
॰ पुलिस की सूझबूझ से खत्म हुआ एक दशक का इंतजार
Ranikhet: मजखाली क्षेत्र में पुलिस की संवेदनशीलता और सूझबूझ ने करीब 10 वर्षों से लापता एक बुजुर्ग को उसके परिवार से मिलाकर मानवीय पुलिसिंग की मिसाल पेश की है। मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण बुजुर्ग अपनी पहचान और घर का पता स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रहे थे। पुलिस ने उनकी बातों और एक छोटे से सुराग को आधार बनाकर चार दिनों की लगातार पड़ताल के बाद परिजनों का पता लगाया।
अल्मोड़ा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर घोड़के के निर्देशन में जनपद पुलिस कानून व्यवस्था के साथ मानवीय सरोकारों को भी प्राथमिकता दे रही है। इसी क्रम में मजखाली चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक विनोद फर्त्याल की नजर क्षेत्र में लंबे समय से भटक रहे एक बुजुर्ग पर पड़ी। पूछताछ के दौरान उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह अपने बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके।
पुलिस बुजुर्ग को सम्मानपूर्वक चौकी लेकर आई और उनके परिजनों की तलाश के लिए लगातार प्रयास किए। जब बातचीत के जरिए कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी तो पुलिस ने अलग तरीका अपनाया। बुजुर्ग को एक डायरी और पेन दिया गया, ताकि उन्हें जो कुछ याद हो, वह लिख सकें।
बुजुर्ग ने डायरी में सिर्फ एक शब्द लिखा ‘राजेपुर’। पुलिस ने इसी छोटे से सुराग को अहम कड़ी मानते हुए उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के थाना राजेपुर से संपर्क किया। बुजुर्ग की फोटो और अन्य विवरण साझा कर पुलिस ने उनकी पहचान सत्यापित कराने का प्रयास शुरू किया।
करीब चार दिनों की लगातार पड़ताल और सत्यापन के बाद बुजुर्ग की पहचान श्याम सिंह के रूप में हुई। पुलिस ने उनके परिवार से भी संपर्क स्थापित कर लिया। जानकारी मिलते ही श्याम सिंह के पुत्र और अन्य परिजन मजखाली चौकी पहुंचे।
करीब एक दशक बाद अपने पिता को सकुशल सामने देखकर परिजनों की आंखें नम हो गईं। परिवार के लिए यह पल किसी चमत्कार से कम नहीं था। परिजनों ने बताया कि श्याम सिंह की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और वह करीब 10 वर्ष पहले घर से लापता हो गए थे। लंबे समय तक तलाश करने के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया था।
वर्षों बाद पिता के सकुशल मिलने पर परिवार ने अल्मोड़ा पुलिस, उत्तराखंड पुलिस और विशेष रूप से मजखाली चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक विनोद फर्त्याल का आभार व्यक्त किया।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि पुलिस की भूमिका केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है। संवेदनशीलता, धैर्य और मानवीय दृष्टिकोण के साथ किया गया प्रयास किसी बिछड़े परिवार को वर्षों बाद उसकी खुशियां लौटा सकता है।

Chief Editor, Aaj Khabar
