Uttarakhand: उत्तराखंड का चमोली जिला एक बार फिर बड़ी आपदा की घटना को लेकर सुर्खियों में है। जिले के मायापुर पीपलकोटी क्षेत्र में गुरुवार शाम निर्माणाधीन टनल में मलबा और पानी भरने से कई मजदूर अंदर फंस गए। घटना के बाद जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, आईटीबीपी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। अब तक 16 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि अन्य को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
जानकारी के अनुसार गुरुवार शाम करीब 7:05 बजे चमोली जिले के मायापुर पीपलकोटी में टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में अचानक मलबा और पानी भरने की सूचना मिली। प्रारंभिक जानकारी में टनल के भीतर 18 से 19 मजदूरों के फंसे होने की बात सामने आई, जबकि बाद में यह संख्या 22 तक बताई गई। टनल का निर्माण कार्य एचसीसी कंपनी की ओर से किया जा रहा है।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन ने तत्काल खोज एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया। राहत एवं बचाव टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद अब तक 16 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। शेष मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए अभियान लगातार जारी है।
मौके पर सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं। डीआईआरएफ, स्थानीय पुलिस और सीआईएसएफ के जवान भी राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। जिला प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और बचाव कार्य के लिए आवश्यक संसाधन मौके पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
पीपलकोटी टनल हादसे का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री स्वयं रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि टनल में फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
आपदाओं का केंद्र बनता जा रहा चमोली
चमोली जिला भौगोलिक और प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण आपदाओं की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में जिले में एक के बाद एक बड़ी आपदाएं सामने आई हैं। रैणी आपदा, जोशीमठ भू धंसाव और तमकनाला की घटना ने जिले में आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ाई हैं।
हाल ही में तमकनाला क्षेत्र में आए जनसैलाब के कारण बैली ब्रिज बह गया था, जिससे जोशीमठ-मलारी हाईवे पर भी आवाजाही प्रभावित हुई थी। लगातार बारिश के बीच पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक मलबा आने की घटनाओं ने चुनौती और बढ़ा दी है।
9 जनवरी 2023 को जोशीमठ में भू धंसाव की घटनाएं सामने आने के बाद पूरे देश का ध्यान चमोली की ओर गया था। शहर के कई घरों और भवनों में दरारें पड़ने लगी थीं। समय के साथ भू धंसाव का दायरा बढ़ता गया, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
भू धंसाव के कारण जोशीमठ के दो बड़े होटलों को भी ध्वस्त करना पड़ा था। बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।
चमोली में वर्ष 2021 में रैणी क्षेत्र में आई भयावह आपदा ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया था। अचानक आई बाढ़ और मलबे के सैलाब में बड़ी संख्या में लोग लापता हुए थे और करीब 200 लोगों की जान चली गई थी।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच पीपलकोटी टनल हादसे ने एक बार फिर चमोली की आपदा संवेदनशीलता और पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Chief Editor, Aaj Khabar
