Dehradun। उत्तराखंड में सरकारी जमीन के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने प्रदेश की करीब 7 हजार बीघा सरकारी जमीन को UIIDB के माध्यम से व्यावसायिक उपयोग और नीलामी की दिशा में ले जाने को लेकर धामी सरकार पर तीखा हमला बोला है।
यशपाल आर्य ने सरकार से सवाल किया है कि इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी जमीन को व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी आखिर किसके हित में की जा रही है।
‘सरकारी जमीन भाजपा या किसी नेता की निजी संपत्ति नहीं’
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकारी जमीन किसी राजनीतिक दल या सत्ताधारी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की जनता की साझा धरोहर है। उन्होंने कहा कि जनता की जमीन से जुड़े फैसले बंद कमरों में बैठकर कुछ चुनिंदा लोगों के हित में नहीं किए जा सकते।
आर्य ने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन, महंगाई और मूलभूत सुविधाओं जैसे मुद्दों पर जनता को जवाब देने में विफल रही है, जबकि दूसरी ओर हजारों बीघा बेशकीमती सरकारी जमीन को व्यावसायिक हितों के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है।
‘किसके लिए तैयार हो रही है जमीन के व्यावसायीकरण की पटकथा?’
यशपाल आर्य ने सवाल उठाया कि क्या जमीन के व्यावसायीकरण के नाम पर सत्ता के करीबियों और चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की पटकथा तैयार की जा रही है?
उन्होंने कहा कि 7 हजार बीघा जमीन कोई छोटी संपत्ति नहीं है। उत्तराखंड जैसे सीमित भू-संसाधनों वाले राज्य में इतनी बड़ी सरकारी भूमि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
उनके मुताबिक इस जमीन का इस्तेमाल स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, विश्वविद्यालय, खेल सुविधाओं, सरकारी संस्थानों, रोजगारपरक परियोजनाओं और अन्य जनहितकारी योजनाओं के लिए किया जा सकता है।
‘उत्तराखंड की जमीन पर पहला अधिकार उत्तराखंड की जनता का’
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उत्तराखंड की जमीन, जंगल, जल और प्राकृतिक संसाधन केवल मौजूदा पीढ़ी की संपत्ति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की पूंजी हैं।
उन्होंने कहा कि जिस राज्य में स्थानीय लोग जमीन, रोजगार और पलायन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, वहां हजारों बीघा सरकारी जमीन के व्यावसायिक इस्तेमाल का फैसला स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस ने दी प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
यशपाल आर्य ने कहा कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर सरकारी संपत्ति की संभावित बंदरबांट नहीं होने देगी। यदि सरकार ने जनता की जमीन को निजी हितों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की तो कांग्रेस इसका हर स्तर पर विरोध करेगी।
उन्होंने सरकार से मांग की कि 7 हजार बीघा सरकारी जमीन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया तत्काल सार्वजनिक की जाए और जनता के सामने स्थिति स्पष्ट की जाए।
आर्य ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मामले में पारदर्शिता नहीं दिखाई तो कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से सदन तक उठाने के साथ प्रदेशव्यापी जनआंदोलन खड़ा करेगी।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की बेशकीमती सरकारी जमीन को किसी भी कीमत पर ‘बिकाऊ माल’ नहीं बनने दिया जाएगा और जनता की संपत्ति की रक्षा के लिए कांग्रेस निर्णायक संघर्ष करेगी।


Chief Editor, Aaj Khabar
