Uttarakhand: उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध सिख तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट शनिवार 23 मई सुबह 11:30 बजे विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए. कपाट खुलने के इस ऐतिहासिक अवसर पर करीब तीन हजार से अधिक श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरी लोकपाल घाटी ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारों से गूंज उठी.
पंच प्यारों की अगुवाई में सिख श्रद्धालुओं का पहला जत्था शनिवार सुबह हेमकुंड साहिब पहुंचा. गुरुद्वारे को पांच क्विंटल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था, जिससे पूरा धाम आकर्षण का केंद्र बना रहा. श्रद्धालुओं में कपाट खुलने को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला.
गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा और वरिष्ठ प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने बताया कि परंपरा के अनुसार सचखंड से गुरुग्रंथ साहिब को दरबार में विराजमान करने के बाद अखंड पाठ, शबद कीर्तन, अरदास और हुक्मनामा लिया गया. पहले दिन श्रद्धालुओं की सुख-समृद्धि और सुरक्षित यात्रा के लिए विशेष अरदास भी आयोजित की गई.
इससे पहले शुक्रवार 22 मई को पंच प्यारों की अगुवाई में पहला जत्था पवित्र निशान साहिब और बैंड-बाजों के साथ रवाना हुआ था. श्रद्धालुओं ने घांघरिया गुरुद्वारे में रात्रि विश्राम किया और शनिवार सुबह हेमकुंड साहिब पहुंचे.
समुद्रतल से लगभग 15,225 फीट की ऊंचाई पर सप्तश्रृंग पर्वत मालाओं के बीच स्थित पवित्र धाम तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 18 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती है. हाल ही में सेना के जवानों ने यात्रा मार्ग से बर्फ हटाकर आवाजाही सुचारू की थी, हालांकि धाम क्षेत्र में अभी भी कई फीट बर्फ जमी हुई है.
हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने के साथ ही भ्यूंडार घाटी का गुरु आस्था पथ श्रद्धालुओं की चहल-पहल से गुलजार हो उठा है. शीतकाल के बाद घाटी में एक बार फिर रौनक लौट आई है और पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है.
गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान सौहार्द, अनुशासन और स्वच्छता बनाए रखने की अपील करते हुए गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त करने का संदेश दिया है.

Chief Editor, Aaj Khabar
