Bhimtal: भीमताल विधानसभा के दूरस्थ क्षेत्र ओखलकांडा स्थित राजकीय इंटर कॉलेज डालकन्या भोलापुर में विद्यार्थियों के साथ कथित मारपीट और धरना-प्रदर्शन से जुड़े मामले पर बाल संरक्षण अधिकार आयोग उत्तराखंड ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने प्रिंट मीडिया, सोशल मीडिया पर प्रसारित खबरों और प्राप्त शिकायतों का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।
इसी क्रम में बाल संरक्षण अधिकार आयोग के सदस्य योगेश सिंह रजवार की अध्यक्षता में विद्यालय परिसर में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक से पहले उन्होंने विद्यालय भवन का निरीक्षण कर शैक्षणिक एवं भौतिक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। साथ ही विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।
बैठक में विद्यालय में पिछले दिनों हुए घटनाक्रम, बच्चों के साथ कथित मारपीट, धरना-प्रदर्शन और इससे शैक्षणिक माहौल पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें शिक्षा विभाग, बाल कल्याण समिति नैनीताल, जिला प्रोबेशन कार्यालय, बाल कल्याण पुलिस इकाई, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग पुलिस टीम, चाइल्ड हेल्पलाइन, खन्स्यू थाना पुलिस, विद्यालय प्रबंधन, प्रधानाचार्य और संबंधित शिक्षक शामिल हुए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग के सदस्य योगेश सिंह रजवार ने शिक्षा विभाग को नोडल विभाग नामित करते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष, पारदर्शी और विस्तृत जांच के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी 10 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत की जाए। जांच समिति में खंड शिक्षा अधिकारी ओखलकांडा सोहलिता नेगी, खंड शिक्षा अधिकारी भीमताल कैना चौहान सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है।
योगेश सिंह रजवार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जाए, ताकि नियमानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि बच्चे देश और प्रदेश का भविष्य हैं। उनकी शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। विद्यालयों में बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की मारपीट, उत्पीड़न अथवा ऐसी गतिविधियां स्वीकार्य नहीं हैं, जिनसे उनकी मानसिक स्थिति और पढ़ाई प्रभावित हो।
आयोग के सदस्य ने कहा कि बच्चों को विद्यालय में सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। शिक्षा के स्थान पर उन्हें धरना-प्रदर्शन जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़े या उनके साथ मारपीट हो, यह किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को जांच के दौरान बच्चों के हितों को सर्वोपरि रखने और उनकी शिक्षा एवं मानसिक स्थिति पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़ने देने के निर्देश दिए। आयोग को जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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Chief Editor, Aaj Khabar
