Kolkata: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा देकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को एक और बड़ा झटका दे दिया है। हाल के दिनों में पार्टी के भीतर असंतोष और बगावत की खबरें लगातार सामने आ रही थीं, और अब सुष्मिता देव के इस्तीफे ने इन अटकलों को और बल दे दिया है।
सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा सौंपते हुए इसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने का अनुरोध किया। हालांकि उन्होंने अपने फैसले के पीछे की विस्तृत वजह सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते मतभेदों और असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है।
असम के सिलचर से पूर्व लोकसभा सांसद रहीं सुष्मिता देव ने 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई और बाद में राज्यसभा भेजा गया। ऐसे में उनका अचानक इस्तीफा पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लंबे समय तक राज्यसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक रहे सुखेंदु शेखर रॉय ने भी अपने पद से इस्तीफा दिया था। रॉय ने पार्टी नेतृत्व पर भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाए थे। उनके आरोपों ने पहले ही बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी थी।
लगातार हो रहे इस्तीफों ने तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक एकजुटता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर असंतोष का यह दौर जारी रहता है, तो इसका असर आने वाले चुनावों और संगठनात्मक मजबूती पर पड़ सकता है।
ममता बनर्जी के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को नियंत्रित करना और असंतुष्ट नेताओं को साथ बनाए रखना है। वहीं विपक्षी भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को अपने लिए राजनीतिक अवसर के रूप में देख रही है। आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर की हलचल पश्चिम बंगाल की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बनी रह सकती है।


Chief Editor, Aaj Khabar
