Ayodhya: सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया द्वारा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई सूचनाओं को उपलब्ध न कराए जाने का मामला अब उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के समक्ष विचाराधीन है। शिकायत और द्वितीय अपील दायर किए जाने के तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अभी तक सुनवाई की तिथि या कोई अन्य सूचना प्राप्त न होने का दावा किया गया है।
दस्तावेज़ों के अनुसार, हेमंत सिंह गौनिया ने 26 मार्च 2025 तथा 16 मई 2025 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, अयोध्या के लोक सूचना अधिकारी को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन भेजे थे। इन आवेदनों में पिछले लगभग 15 वर्षों के दौरान राम मंदिर में आए देश-विदेश के श्रद्धालुओं की संख्या, प्राप्त सोना-चांदी, हीरे-मोती, नकद दान, कर्मचारियों की संख्या, वेतन, मंदिर निर्माण पर हुए व्यय, राशन एवं अन्य दान सामग्री सहित विभिन्न विषयों पर प्रमाणित सूचनाएं मांगी गई थीं।
ट्रस्ट की ओर से 3 अप्रैल 2025 और 24 मई 2025 को दिए गए उत्तरों में कहा गया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 2(h) के अंतर्गत “लोक प्राधिकरण” नहीं है। उत्तर में यह भी कहा गया कि ट्रस्ट न तो भारत सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में है और न ही सरकार द्वारा वित्तपोषित संस्था है। ट्रस्ट ने अपने गठन का आधार 9 नवंबर 2019 को दिए गए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय तथा 5 फरवरी 2020 को हुए पंजीकरण को बताया और इसी आधार पर आरटीआई आवेदन स्वीकार करने से इनकार किया।
इन उत्तरों से असंतुष्ट होकर हेमंत सिंह गौनिया ने प्रथम अपील दायर की। उनका आरोप है कि प्रथम अपील पर भी विधिसम्मत निर्णय नहीं दिया गया और न ही मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग, लखनऊ में सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 18 के अंतर्गत शिकायत तथा धारा 19(3) के अंतर्गत द्वितीय अपील प्रस्तुत की।
द्वितीय अपील में कहा गया है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान, सोना-चांदी, नकद राशि तथा अन्य संपत्तियां सार्वजनिक महत्व का विषय हैं। इसलिए संस्था के कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। अपील में आयोग से पहले यह तय करने का अनुरोध किया गया है कि क्या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 2(h) के अंतर्गत लोक प्राधिकरण की श्रेणी में आता है। यदि आयोग ऐसा मानता है, तो ट्रस्ट को मांगी गई समस्त सूचनाएं प्रमाणित प्रतियों सहित उपलब्ध कराने तथा संबंधित लोक सूचना अधिकारी के विरुद्ध सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20 के तहत आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई है।
अपील में यह भी उल्लेख किया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 7(1) के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध कराना अनिवार्य है। साथ ही दूरस्थ निवास का हवाला देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग अथवा दूरभाष के माध्यम से सुनवाई कराने का भी अनुरोध किया गया है।
हेमंत सिंह गौनिया का कहना है कि वे लंबे समय से विभिन्न सरकारी एवं सार्वजनिक महत्व के मामलों में सूचना के अधिकार के माध्यम से पारदर्शिता की मांग उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि राम मंदिर ट्रस्ट से तथ्यात्मक सूचनाएं मांगने के बावजूद प्रत्येक बार यह कहते हुए आवेदन स्वीकार नहीं किया गया कि ट्रस्ट आरटीआई अधिनियम के दायरे में नहीं आता।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में शिकायत और द्वितीय अपील दायर किए जाने के बाद तीन महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक सुनवाई की तिथि अथवा कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। उनके अनुसार, राम मंदिर परिसर में हाल में सामने आई चोरी की घटनाओं के बाद दान, सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे और अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। उनका कहना है कि वे इस विषय को आगे भी उपलब्ध कानूनी मंचों पर उठाते रहेंगे।
फिलहाल यह मामला उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के विचाराधीन है। आयोग का यह निर्णय महत्वपूर्ण होगा कि क्या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत लोक प्राधिकरण माना जाएगा तथा क्या ट्रस्ट को मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाएगा। इसी निर्णय पर इस प्रकरण की आगे की दिशा निर्भर करेगी।

Chief Editor, Aaj Khabar
