Bhopal: मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पार्टी की एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन मंगलवार को रिटर्निंग ऑफिसर ने खारिज कर दिया। इसके बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया है।
जानकारी के अनुसार, भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना में लंबित एक मामले की जानकारी नहीं दी। आपत्ति मिलने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने नटराजन से जवाब मांगा और मंगलवार शाम 6 बजे तक अपना पक्ष रखने का समय दिया। जवाब पर विचार करने के बाद अधिकारी ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया।
हालांकि कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। कांग्रेस सांसद विवेक तंखा ने कहा कि केवल एक नोटिस प्राप्त हुआ था, जिसमें यह पूछा गया था कि उनके और अन्य लोगों के खिलाफ 10 करोड़ रुपये के मुआवजे की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। तंखा ने इस फैसले को लोकतंत्र की हत्या बताते हुए पार्टी नेताओं से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की अपील की।
मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 सीटों में से वर्तमान प्रभावी संख्या 229 है। राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है और जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 58 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होगी। विधानसभा में भाजपा के पास स्पीकर को छोड़कर 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 63 विधायक और उसकी सहयोगी भारत आदिवासी पार्टी का एक विधायक है।
भाजपा ने इस चुनाव में राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, प्रदेश सचिव रजनीश अग्रवाल और मध्य प्रदेश मत्स्य कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को उम्मीदवार बनाया है। वहीं कांग्रेस ने केवल मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा था।
नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा पर “राजनीतिक ठगी” का आरोप लगाया। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि भाजपा कांग्रेस की संभावित राज्यसभा सीट छीनने के लिए राजनीतिक मर्यादाओं को छोड़ चुकी है। कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग और विधायकों की टूट-फूट की आशंका के बीच अपने अधिकांश विधायकों को भोपाल से बेंगलुरु भेज दिया, जहां पार्टी की सरकार है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के पास अपने दो उम्मीदवारों को आसानी से जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल है, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता होगी। इसी कारण भाजपा द्वारा तीसरा उम्मीदवार उतारने के फैसले ने पहले से ही राजनीतिक हलचल बढ़ा दी थी। अब कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद तीसरी सीट पर भाजपा की राह और आसान होती दिखाई दे रही है।
मामले ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है और कांग्रेस कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। यदि पार्टी सुप्रीम कोर्ट का रुख करती है, तो आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।


Chief Editor, Aaj Khabar
