Haridwar Kumbh 2027 Uttarakhand Government
Headlines

Dehradun: मुख्यमंत्री धामी ने किया ‘उत्तराखंड राज्य का नवीन राजनीतिक इतिहास’ पुस्तक का विमोचन, क्षेत्रीय भाषाओं व सांस्कृतिक संरक्षण पर दिया विशेष जोर

Dehradun: मुख्यमंत्री धामी ने किया ‘उत्तराखंड राज्य का नवीन राजनीतिक इतिहास’ पुस्तक का विमोचन, क्षेत्रीय भाषाओं व सांस्कृतिक संरक्षण पर दिया विशेष जोर
शेयर करे-

Dehradun: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रतिष्ठित लेखक जय सिंह रावत की पुस्तक ‘उत्तराखंड राज्य का नवीन राजनीतिक इतिहास’ का विमोचन करते हुए इसे राज्य की 25 वर्षीय राजनीतिक यात्रा का प्रामाणिक दस्तावेज़ करार दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के बाद के राजनीतिक, प्रशासनिक व विकासात्मक बदलावों को जिस गहनता और सटीकता से लेखक ने संकलित किया है, वह सराहनीय और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति, इतिहास और परंपराओं पर अनेक पुस्तकें लिखी गई हैं, लेकिन राज्य स्थापना के बाद के ढाई दशक की घटनाओं का तथ्यों, दस्तावेज़ों और विश्लेषण के आधार पर संग्रहण एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, जिसे जय सिंह रावत ने उत्कृष्टता के साथ पूरा किया है। उन्होंने कहा कि पांच भागों में विभाजित यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों और प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी में जुटे युवाओं के लिए विशेष महत्व रखती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य बनने के बाद उत्तराखंड ने राजनीतिक अस्थिरता के दौर को भी झेला, जिसका असर विकास पर पड़ा। लेखक द्वारा दुर्लभ दस्तावेज़ों और अखबारों की क्लिपिंग्स के आधार पर तैयार यह संकलन राज्य की राजनीतिक समझ को नई दिशा देता है। उन्होंने कहा कि “इतिहास लेखन तथ्य, दृष्टि और ईमानदारी का विज्ञान है, और रावत जी ने इसे पत्रकारिता की निष्ठा के साथ प्रस्तुत किया है।”

तकनीक और AI के बढ़ते दौर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक महत्वपूर्ण है, लेकिन गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी सहित सभी स्थानीय भाषाओं और बोलियों का संरक्षण हम सभी का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी मातृभाषाओं में लेखन, साहित्य और लोक परंपराओं से जुड़े कार्यों को बढ़ावा देने की अपील की। राज्य सरकार इन कार्यों के लिए प्रतियोगिताएं और सम्मान योजनाएँ संचालित कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुस्तक पढ़ने की आदत को बचाए रखना जरूरी है। “AI कितनी भी उन्नत हो जाए, पुस्तकों का विकल्प कभी नहीं हो सकती। पुस्तकें विचार, चिंतन और समझ की गहरी प्रक्रिया हैं।” उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपनी भाषा और जड़ों को समझते हैं, तो उनमें सांस्कृतिक चेतना और आत्मविश्वास मजबूत होता है।

उन्होंने बताया कि सरकार स्थानीय भाषाओं, साहित्य और पारंपरिक बोलियों के डिजिटलाइजेशन पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि क्षेत्रीय भाषाओं का विशाल सांस्कृतिक खजाना नई पीढ़ी के लिए सहज उपलब्ध हो सके। डिजिटल माध्यमों पर सामग्री उपलब्ध कराने से यह भाषाएँ आधुनिकता के साथ और अधिक सशक्त रूप से आगे बढ़ेंगी।

कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक बृज भूषण गैरोला सहित अनेक पत्रकार, साहित्यकार और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

Dehradun

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *