Dehradun: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखंड के पांच प्रमुख आपदा-प्रभावित जिलों—हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर, नैनीताल, देहरादून और चंपावत—में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आयोजित इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में समन्वय, त्वरित राहत और प्रभावी बचाव सुनिश्चित करना था। ड्रिल का आयोजन कुल 23 स्थानों पर किया गया।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से इस मॉक ड्रिल की बारीकी से निगरानी की गई। जिलाधिकारियों ने रिस्पांसिबल ऑफिसर की भूमिका में रहकर सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की। स्टेजिंग एरिया, राहत शिविरों, इन्सिडेंट कमांड पोस्ट और जिला नियंत्रण केंद्रों की व्यवस्थाओं का गहन अवलोकन लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से किया गया, जिससे तैयारी की वस्तुनिष्ठ स्थिति सामने आई।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखण्ड के पाँच सर्वाधिक आपदा-प्रभावित जनपदों हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर, नैनीताल, देहरादून और चम्पावत में मॉक ड्रिल आयोजित की गई। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आयोजित यह अभ्यास 23 स्थानों पर किया गया, जिसका उद्देश्य आपदा के समय… pic.twitter.com/7nBFhX6Rhl
— Uttarakhand DIPR (@DIPR_UK) June 30, 2025
सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने जानकारी दी कि सभी विभागों ने मॉक ड्रिल में सराहनीय सहभागिता निभाई। आईआरएस प्रणाली के अंतर्गत अधिकारियों को अपनी भूमिका की स्पष्ट जानकारी रही, जिससे कहीं कोई भ्रम की स्थिति नहीं बनी। संसाधनों की समय पर उपलब्धता और त्वरित राहत व बचाव कार्यों से यह सिद्ध हुआ कि राज्य आपदा प्रबंधन के प्रति सजग है।
ड्रिल के दौरान जो कमियाँ चिन्हित हुईं, उन्हें शीघ्र दूर किया जाएगा। सचिव सुमन ने आगे बताया कि आगामी महीनों में स्कूलों, अस्पतालों, अपार्टमेंट्स, मॉल्स और फैक्ट्रियों में भूकंप, अग्निकांड और भगदड़ जैसी स्थितियों से निपटने के लिए भी मॉक ड्रिल आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा राज्य खतरनाक रासायनिक, जैविक और रेडियोलॉजिकल आपदाओं के प्रबंधन हेतु भी पूर्ण रूप से तैयार है।
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Chief Editor, Aaj Khabar

