Dehradun: उत्तराखंड सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अब सरकार की उपलब्धियों के साथ-साथ जवाबदेही को लेकर भी सवाल तेज हो गए हैं। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक वर्गों की ओर से सरकार से मांग की जा रही है कि वह अपने पूरे कार्यकाल का विस्तृत श्वेत पत्र जारी कर प्रदेश की वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखे।
प्रदेश में बढ़ती महंगाई, लगातार बढ़ती बेरोजगारी, कमजोर होती स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों से लगातार हो रहा पलायन, कानून व्यवस्था पर उठते सवाल और बढ़ते भ्रष्टाचार ने भी सरकार की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। इसके अलावा भूमिधारी अधिकार, आपदा प्रबंधन और पुनर्वास जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी सरकार की भूमिका को लेकर संतोषजनक जवाब सामने नहीं आए हैं।
ऐसे में यह मांग जोर पकड़ रही है कि सरकार केवल अपनी उपलब्धियों का प्रचार करने के बजाय जमीनी हकीकत को भी सामने रखे और जनता के सवालों का स्पष्ट जवाब दे।
जनता और विभिन्न संगठनों की ओर से सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे जा रहे हैं। इनमें महंगाई पर नियंत्रण के लिए उठाए गए ठोस कदम, युवाओं को रोजगार देने के लिए सृजित अवसर और भर्तियां, स्वास्थ्य सेवाओं में जमीनी सुधार, शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए की गई पहल, पलायन रोकने की नीति, कानून व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास और भ्रष्टाचार पर की गई कार्रवाई शामिल हैं।
इसके साथ ही आपदा प्रभावितों के स्थायी पुनर्वास की नीति और संवेदनशील क्षेत्रों के लिए पूर्व चेतावनी एवं रोकथाम तंत्र विकसित करने को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा जा रहा है।
मांग करने वालों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता और जवाबदेही में विश्वास रखती है, तो उसे बिना किसी देरी के चार वर्षों का श्वेत पत्र जारी कर हर सवाल का तथ्यात्मक और स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
प्रदेश की जनता अब केवल घोषणाओं और विज्ञापनों से संतुष्ट नहीं है, बल्कि वह जमीनी विकास, ठोस परिणाम और जवाबदेही की अपेक्षा कर रही है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती है कि वह जनता के विश्वास पर खरा उतरते हुए इन सभी मुद्दों पर स्पष्ट, ईमानदार और पारदर्शी जवाब दे।

Chief Editor, Aaj Khabar
