Dehradun: उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 में इस बार जहां दिग्गजों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली, वहीं युवाओं ने भी अपने दम पर नई पहचान बनाई। राज्यभर के विभिन्न जिलों से कई ऐसे चेहरे सामने आए जिन्होंने सबसे कम उम्र में ग्राम प्रधान बनकर न केवल लोकतंत्र में भागीदारी निभाई, बल्कि विकास की दिशा में युवा सोच को आगे रखने का संकल्प भी लिया। इनमें 21 से 23 वर्ष आयु वर्ग के युवा शामिल हैं, जिन्होंने बड़े-बड़े अनुभवी प्रत्याशियों को पीछे छोड़ते हुए सफलता हासिल की।
चमोली की प्रियंका नेगी बनीं सबसे कम उम्र की प्रधान
गैरसैंण विकासखंड के आदर्श ग्राम सारकोट से 21 साल 3 माह की प्रियंका नेगी ने प्रधान पद पर जीत हासिल की। उन्हें 421 वोट मिले जबकि प्रतिद्वंद्वी को 235 वोट ही प्राप्त हुए। राजनीति शास्त्र से स्नातक प्रियंका पूर्व प्रधान रह चुके अपने पिता राजेंद्र नेगी की प्रेरणा से राजनीति में आई हैं। खास बात यह है कि उनका गांव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा गोद लिया गया है।
थौलधार की कंचन ने कम उम्र में जीता विश्वास
टिहरी गढ़वाल जिले के नकोट गुसाईं गांव से 21 साल 6 माह की कंचन ने प्रधान पद पर कब्जा जमाया। राजमिस्त्री के परिवार से आने वाली कंचन ने बताया कि चुनावी वादों का टूटना उन्हें कचोटता रहा, इसलिए उन्होंने स्वयं नेतृत्व का निर्णय लिया। उनकी प्राथमिकताएं मूलभूत सुविधाओं जैसे रास्ते, पेयजल और प्रमाणपत्रों की व्यवस्था को बेहतर बनाना हैं।
चंपावत की तनुजा ने किया बड़े नामों को पराजित
ग्राम पंचायत शक्तिपुर बुंगा में 21 वर्षीय बीएससी पास तनुजा बिष्ट ने अनुभवी प्रत्याशियों को मात देकर जीत दर्ज की। उनका कहना है कि युवा सोच के साथ वे गांव के विकास में भागीदारी निभाना चाहती हैं।
22 वर्षीय साक्षी और ईशा भी बनीं युवा नेतृत्व की मिसाल
पौड़ी के पाबौ ब्लॉक की कुई ग्राम पंचायत से 22 साल की साक्षी प्रधान बनी हैं। वे बीकॉम स्नातक हैं और तकनीकी साधनों से गांव को आगे ले जाने का इरादा रखती हैं। वहीं, मुनस्यारी विकासखंड की क्विरिजिमिया ग्राम पंचायत से 22 वर्षीय ईशा, जो बीएड पास हैं, ने प्रधान पद पर जीत दर्ज की है। वे युवाओं को भी पंचायत में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं।
टॉस से मिली जीत, नितिन नेगी बने ग्राम प्रधान
चमोली के दसोली ब्लॉक के बणद्वारा गांव में हुए मुकाबले में 23 वर्षीय नितिन नेगी और उनके प्रतिद्वंद्वी को समान 138 वोट मिले। निर्वाचन नियमों के अनुसार टॉस के जरिए निर्णय लिया गया, जिसमें नितिन विजेता बने।
इस पंचायत चुनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अब ग्रामीण नेतृत्व की कमान युवा हाथों में पहुंच रही है, जो नई सोच, ऊर्जा और दृढ़ संकल्प के साथ उत्तराखंड के गांवों को विकास की नई राह पर ले जाने को तैयार हैं।
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Chief Editor, Aaj Khabar

