Haldwani: नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई से जूझ रही जनता पर तेल कीमतों का अतिरिक्त बोझ डालना अन्यायपूर्ण है, जबकि सरकारी तेल कंपनियां हजारों करोड़ रुपये का मुनाफा कमा चुकी हैं।
यशपाल आर्य ने कहा कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री की ओर से यह दावा किया गया कि सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन करीब 1000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र की तीन प्रमुख तेल कंपनियों के वित्तीय आंकड़े कुछ और ही तस्वीर दिखाते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन कंपनियों ने वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में लगभग 19,470 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 41 प्रतिशत अधिक है।
उन्होंने कहा कि यदि कंपनियां इतने बड़े लाभ में थीं, तो अचानक घाटे की बात क्यों सामने लाई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और युद्ध का हवाला दिया जा रहा है, जबकि युद्ध 28 फरवरी से शुरू हुआ था और उसका प्रभाव अप्रैल से माना जा सकता है। ऐसे में सीमित अवधि के संभावित नुकसान को आधार बनाकर लगातार कीमतें बढ़ाना जनता के साथ अन्याय है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। परिवहन महंगा होने से खाद्यान्न, सब्जियां और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ते हैं, खेती की लागत बढ़ती है और छोटे कारोबार प्रभावित होते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कंपनियां मुनाफा कमाती हैं तो उसका लाभ जनता को क्यों नहीं मिलता और घाटे की भरपाई सीधे नागरिकों से क्यों की जाती है।
यशपाल आर्य ने तेल मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि सरकार को जनता के सामने वास्तविक तथ्य रखने चाहिए और संकट की परिस्थितियों को राजस्व बढ़ाने का माध्यम नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकारें जनता के लिए होती हैं, न कि कंपनियों के मुनाफे के लिए।

Chief Editor, Aaj Khabar
