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Haldwani: संस्थागत सुधार से वैश्विक पहचान तक, कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने रखी उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की नई शैक्षिक दृष्टि

Haldwani: संस्थागत सुधार से वैश्विक पहचान तक, कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने रखी उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की नई शैक्षिक दृष्टि
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Haldwani: तेजी से बदलते उच्च शिक्षा परिदृश्य में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने बीते एक वर्ष में अनेक ठोस नीतिगत फैसलों, नवाचारों और संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान को और मजबूत किया है। प्रवेश संख्या में बढ़ोतरी से लेकर शोध संस्कृति के सुदृढ़ीकरण, मुफ्त अध्ययन सामग्री वितरण, सैन्य संस्थानों के साथ सहयोग और वैश्विक स्तर पर MOOC विस्तार तक—विश्वविद्यालय बहुआयामी परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। इन्हीं मुद्दों पर कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी से हुई विस्तृत बातचीत के प्रमुख अंश प्रस्तुत हैं।

राज्य के कई विश्वविद्यालयों में घटते नामांकन के बीच मुक्त विश्वविद्यालय में लगभग 2000 नए प्रवेश दर्ज होना किसी संयोग का परिणाम नहीं है। कुलपति के अनुसार, नए रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम, डिजिटल प्लेटफॉर्म का सशक्तीकरण और छात्र-अनुकूल प्रक्रियाओं ने ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग के प्रति भरोसा बढ़ाया है। यह रुझान भविष्य में और सुदृढ़ होने की संभावना दर्शाता है।

वर्षों से गोदामों में पड़े अध्ययन सामग्री के पुनः उपयोग को लेकर विश्वविद्यालय ने बड़ा कदम उठाया है। सिलेबस परिवर्तन के कारण अप्रयुक्त पुस्तकों को राज्यभर में पुस्तक मेलों और शैक्षिक आयोजनों के माध्यम से निःशुल्क वितरित किया जा रहा है। मात्र दो महीनों में 50 से अधिक स्थानों पर हजारों विद्यार्थियों तक सामग्री पहुँचाई जा चुकी है, जिससे संसाधनों का सार्थक उपयोग सुनिश्चित हुआ है।

शैक्षणिक सहयोग के मोर्चे पर, सैन्य संस्थानों के साथ हुए और प्रस्तावित एमओयू को औपचारिकता नहीं बल्कि व्यावहारिक साझेदारी बताया गया। सैनिकों और आम विद्यार्थियों—दोनों के लिए नेतृत्व, आपदा प्रबंधन, स्किल अपग्रेडेशन और लचीले डिजिटल कोर्स विकसित किए जा रहे हैं, जिससे शिक्षा का दायरा और प्रभाव बढ़ेगा।

शोध को विश्वविद्यालय की पहचान मानते हुए एक करोड़ रुपये का ‘शोध संवर्धन फंड’ स्थापित किया गया है। इसके अंतर्गत शिक्षकों को विशेष शोध अनुदान, प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशन पर प्रोत्साहन और बहु-विषयी परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, बिना नौकरी और फेलोशिप वाले शोधार्थियों के लिए विशेष छात्रवृत्ति योजना शुरू की जा रही है, जिसकी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और योग्यता-आधारित होगी।

पर्वतीय जिलों में ‘उन्नत शैक्षिक केंद्र’ खोलने की योजना को व्यवहारिक अध्ययन पर आधारित बताते हुए कुलपति ने स्पष्ट किया कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, कृषि, पर्यटन, जड़ी-बूटी, आईटी स्किल और करियर मार्गदर्शन को केंद्र में रखा जाएगा। इसका उद्देश्य पहाड़ों के युवाओं को उनके घर के पास गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना है।

विज्ञान शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने के लिए बी.एससी. छात्रों की फीस में 3000 रुपये की कटौती की गई है। यह निर्णय व्यय-कटौती, डिजिटल प्रक्रियाओं और बढ़ते नामांकन के संतुलित वित्तीय मॉडल पर आधारित है, जिससे विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिरता बनी रहेगी।

MOOC प्लेटफॉर्म पर इस वर्ष 42,454 पंजीकरण और 51 देशों के शिक्षार्थियों की भागीदारी ने विश्वविद्यालय की वैश्विक स्वीकार्यता को रेखांकित किया है। आने वाले समय में ऑनलाइन कार्यक्रमों के विस्तार के साथ इस अंतरराष्ट्रीय पहुँच को स्थायी रूप देने का लक्ष्य रखा गया है।

अंततः, कुलपति का मानना है कि विश्वविद्यालय की असली कसौटी केवल प्रवेश संख्या नहीं, बल्कि शोध आउटपुट, नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी है। मुक्त विश्वविद्यालय ऐसा मॉडल विकसित कर रहा है, जिसमें शिक्षा स्वयं शिक्षार्थी तक पहुँचे—यही भविष्य की दिशा है।

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