देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री यशपाल आर्य ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का नाम बदलकर “विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)” (VB-GRAMG) किए जाने पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि नया कानून मनरेगा के मूल सिद्धांत “काम के अधिकार” को कमजोर करता है और करोड़ों ग्रामीण मजदूरों के भविष्य को असुरक्षित बनाता है।
केंद्र–राज्य अंशदान में बदलाव से राज्यों पर बढ़ेगा बोझ
श्री आर्य ने कहा कि मनरेगा में पहले 90 प्रतिशत अंशदान केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत राज्य सरकार का होता था, लेकिन नई योजना में केंद्र का अंशदान घटाकर 60 प्रतिशत और राज्यों का हिस्सा 40 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे गरीब और पिछड़े राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
मांग आधारित रोजगार व्यवस्था समाप्त
उन्होंने बताया कि MGNREGA एक मांग आधारित योजना थी, जिसमें मजदूर के काम मांगने पर केंद्र सरकार को रोजगार और भुगतान देना अनिवार्य था। नई योजना में यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब रोजगार केंद्र द्वारा तय पूर्व-निर्धारित बजट और मानकों पर निर्भर करेगा।
उन्होंने कहा, “फंड खत्म तो अधिकार खत्म”—यह रोजगार गारंटी कानून की आत्मा के खिलाफ है।
पंचायतों की भूमिका कमजोर, केंद्रीयकरण को बढ़ावा
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मनरेगा के तहत ग्राम सभाओं और पंचायतों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम तय करने का अधिकार था, जिससे लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होती थीं। नई योजना में यह अधिकार सीमित कर दिया गया है और निर्णय केंद्र के डिजिटल ढांचे के माध्यम से होंगे।
तकनीकी शर्तें बनेंगी गरीबों के लिए बाधा
श्री आर्य ने कहा कि नई स्कीम में GIS, बायोमेट्रिक्स, जियो-टैगिंग, डिजिटल डैशबोर्ड और ऑडिट अनिवार्य किए गए हैं।
उन्होंने चेताया कि जो ग्रामीण मजदूर इन तकनीकों से परिचित नहीं हैं, वे रोजगार से वंचित रह जाएंगे।
दो महीने तक रोजगार की कोई गारंटी नहीं
उन्होंने कहा कि खेती-किसानी के सीजन में दो महीने तक रोजगार की कोई कानूनी गारंटी नहीं दी जाएगी। इससे मजदूरों को ठेकेदारों और शोषण के हवाले छोड़ दिया जाएगा।
नाम बदलने पर करोड़ों का खर्च, जनता पर बोझ
श्री आर्य ने कहा कि किसी योजना का नाम बदलना सिर्फ प्रतीकात्मक बदलाव नहीं होता। इससे सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है, जिसका सीधा असर जनता पर पड़ता है।
“गरीबी खत्म करने के बजाय गरीबों को खत्म किया जा रहा है”
उन्होंने आरोप लगाया कि देश में धन का केंद्रीयकरण कर सिर्फ 10 प्रतिशत लोगों की आय को आधार बनाकर 90 प्रतिशत जनता को “विकसित भारत” का सपना दिखाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बेरोजगारी और महंगाई जैसे असली मुद्दों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है।
कांग्रेस करेगी पुरजोर विरोध
श्री यशपाल आर्य ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस कानून और इसके प्रावधानों का पुरजोर विरोध करेगी।
उन्होंने कहा, “करोड़ों गरीब, मजदूर और कामगारों के अधिकार सत्ता के हाथों छिनने नहीं दिए जाएंगे।”


Chief Editor, Aaj Khabar
