Uttarakhand: उत्तराखंड में प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद अब एक और बीजेपी विधायक विवादों में घिर गई हैं। केदारनाथ विधानसभा सीट से विधायक आशा नौटियाल ने हाल ही में केदारनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की थी, जिससे विपक्ष खासकर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस ने उनके इस बयान को संविधान विरोधी बताते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है।
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विधायक बनने के दौरान आशा नौटियाल ने संविधान की रक्षा और देश की एकता व अखंडता बनाए रखने की शपथ ली थी, लेकिन उनका बयान संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अल्पसंख्यक और अन्य धर्मों के लोग देश के नागरिक नहीं हैं? माहरा ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान न केवल समाज को बांटने का काम करते हैं, बल्कि देश के संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ भी हैं।
करन माहरा ने आगे कहा कि केदारनाथ में घोड़े-खच्चर चलाने वालों में 50 प्रतिशत से अधिक लोग अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अमरनाथ गुफा की खोज भी एक मुस्लिम चरवाहे ने की थी। माहरा ने कहा कि सनातन धर्म सबको स्वीकार करने की सीख देता है और दया व धर्म की भावना पर आधारित है। ऐसे में इस तरह के भेदभावपूर्ण बयान नहीं दिए जाने चाहिए।
विवाद बढ़ने के बाद विधायक आशा नौटियाल ने अपने बयान में बदलाव किया और सफाई देते हुए कहा कि उनकी मांग केवल उन लोगों पर प्रतिबंध लगाने की थी, जो केदारनाथ धाम और उसके मार्ग में शराब और मांस की बिक्री करते हैं। हालांकि, कांग्रेस इस सफाई से संतुष्ट नहीं है और उनका कहना है कि विधायक ने अपनी शपथ का उल्लंघन किया है, इसलिए उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
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Chief Editor, Aaj Khabar
