Headlines

Uttarakhand: बेस अस्पताल श्रीनगर की डायलिसिस यूनिट की कमान अब हंस फाउंडेशन के हाथ

Uttarakhand: बेस अस्पताल श्रीनगर की डायलिसिस यूनिट की कमान अब हंस फाउंडेशन के हाथ
शेयर करे-

॰सितंबर के प्रथम सप्ताह के बाद नई व्यवस्था से शुरू होगा संचालन, 62 मरीजों को मिलती रहेगी गुणवत्तापूर्ण डायलिसिस सुविधा

Uttarakhand: राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस चिकित्सालय की डायलिसिस यूनिट अब हंस फाउंडेशन के अधीन संचालित होगी। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन और हंस फाउंडेशन के बीच तीन वर्ष के लिए एमओयू हो गया है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सितंबर के प्रथम सप्ताह के पश्चात फाउंडेशन यूनिट का पूर्ण संचालन अपने अधीन लेगा।

बेस अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में वर्तमान में 10 बेड हैं, जहां विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले करीब 62 मरीज नियमित रूप से डायलिसिस कराते हैं। यूनिट में हर माह लगभग 513 डायलिसिस किए जाते हैं। नई व्यवस्था के बाद भी मरीजों को पूर्व की भांति नियमित, व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिलता रहेगा।

हंस फाउंडेशन की दो सदस्यीय टीम ने एमओयू से पहले यूनिट का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। वरिष्ठ परियोजना प्रबंधक अमर सिंह और सहायक कार्यक्रम प्रबंधक वरुना सिंह ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीएमएस रावत और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एएन पांडेय के साथ यूनिट का निरीक्षण किया। टीम ने उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी लेने के साथ संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

नई व्यवस्था के तहत डायलिसिस मशीनों के नियमित रखरखाव, कंज्यूमेबल्स, तकनीकी जांच और फिटनेस परीक्षण के साथ मानव संसाधन की जिम्मेदारी भी हंस फाउंडेशन की होगी। फाउंडेशन की ओर से नेफ्रोलॉजिस्ट, मेडिकल ऑफिसर, डायलिसिस टेक्नीशियन, नर्सिंग स्टाफ, वार्ड असिस्टेंट, हाउसकीपिंग स्टाफ और एडमिनिस्ट्रेटर उपलब्ध कराए जाएंगे।

खास बात यह है कि यूनिट के संचालन की जिम्मेदारी बदलने के बावजूद मरीजों से लिए जाने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं होगा। आयुष्मान कार्ड से पात्र मरीजों को पहले की तरह निःशुल्क डायलिसिस सुविधा मिलती रहेगी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य मरीजों को निर्बाध और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है।

इस पहल की प्रक्रिया पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के कार्यकाल में शुरू हुई थी। इसके बाद वर्तमान चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के कार्यकाल में प्रक्रिया आगे बढ़ते हुए एमओयू तक पहुंची। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना की ओर से भी विभागीय स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने में सहयोग किया गया।

प्राचार्य डॉ. सीएमएस रावत ने कहा कि हंस फाउंडेशन के साथ तीन वर्ष का एमओयू किया गया है। मरीजों को पूर्व की भांति नियमित और बेहतर डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराना इसका उद्देश्य है। आयुष्मान कार्डधारक पात्र मरीजों को निःशुल्क डायलिसिस सुविधा मिलती रहेगी और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देना अस्पताल प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि बेस अस्पताल की डायलिसिस यूनिट का संचालन हंस फाउंडेशन को सौंपना मरीजों के हित में बड़ा कदम है। इससे पहाड़ के मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर डायलिसिस सुविधा मिल सकेगी और उन्हें उपचार के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में जाने की जरूरत कम होगी। सरकार प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *