Dehradun: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे भारतीय वन सेवा 2023-25 बैच के परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह आज वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के दीक्षांत गृह में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह 21वीं सदी का अब तक का सबसे बड़ा बैच रहा, जिसमें 109 भारतीय परिवीक्षार्थी अधिकारियों के साथ भूटान के 2 विदेशी प्रशिक्षुओं सहित कुल 111 प्रशिक्षु अधिकारियों ने प्रशिक्षण पूर्ण किया।
समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन रहे। उन्होंने सभी प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र और पदक प्रदान किए तथा अपने प्रेरणादायी भाषण में उन्हें सेवाकाल में ईमानदारी, करुणा और अनुशासन के मूल्यों को अपनाने की सीख दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अधिकारी को अपने दायित्वों के प्रति सजग रहते हुए ऐसा कार्य करना चाहिए जिससे सेवा के अंत में उन्हें आत्मसंतोष और पूर्णता की अनुभूति हो।
अकादमी के निदेशक डॉ. जगमोहन शर्मा ने अपने रिपोर्ट प्रस्तुतीकरण में बताया कि भारत सहित अब तक 14 मित्र राष्ट्रों के वन अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इस बैच में 22 महिला अधिकारी भी शामिल थीं और 50 अधिकारियों को ऑनर्स डिप्लोमा प्रदान किया गया। यह बैच पाठ्यक्रम के नए स्वरूप के तहत पासआउट होने वाला पहला समूह है।
केरल संवर्ग के श्री मिधुनमोहन एस.बी. को बैच टॉपर घोषित किया गया। समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार भी प्रदान किए गए।
न्यायमूर्ति रामासुब्रमण्यन ने अधिकारियों को नियमों का कड़ाई से पालन करने और निर्णयों में सतर्कता बरतने की सलाह देते हुए कहा कि एक छोटा-सा गलत निर्णय भविष्य को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने ‘सत्यं वद, धर्मं चर’ का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से सदैव सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
इस भव्य समारोह में उत्तराखंड के पीसीसीएफ (एचओएफएफ), महानिदेशक आईसीएफआरई, एफआरआई निदेशक, वानिकी शिक्षा निदेशालय के निदेशक सहित वन विभाग एवं पर्यावरण क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि, प्रशिक्षु अधिकारियों के परिजन और अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
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Chief Editor, Aaj Khabar

