Haldwani: वरिष्ठ न्यूरोसर्जन एवं विवेकानंद हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. महेश शर्मा ने बताया कि श्री पान सिंह पिछले एक महीने से चल नहीं पा रहे थे। उनके हाथ-पैर की ताकत धीरे-धीरे कम हो रही थी। इस दौरान उन्होंने झाड़-फूंक का सहारा लिया, जिससे उन्हें कुछ राहत भी मिली। हालांकि, एक दिन अचानक बेहोश होकर गहरे कोमा की स्थिति में उन्हें अस्पताल लाया गया।
डॉ. महेश शर्मा के अनुसार, सीटी स्कैन में पता चला कि मरीज के मस्तिष्क में एक महीने से बढ़ता हुआ खून का थक्का काफी बड़ा हो चुका था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल सर्जरी कर थक्का निकाला गया। ऑपरेशन के बाद मरीज 2 से 3 दिन में दोबारा होश में आ गए और पूरी तरह सामान्य दैनिक गतिविधियां करने लगे।
डॉ. शर्मा ने कहा कि इस तरह का परिणाम हर मरीज में संभव नहीं होता। उन्होंने झाड़-फूंक को आस्था का विषय बताते हुए कहा कि इस पर टिप्पणी नहीं की जा सकती, लेकिन समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेना बीमारी को अनावश्यक रूप से गंभीर होने से बचा सकता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि हाथ-पैर या चेहरे में कमजोरी, बोलने में परेशानी अथवा आवाज में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सीटी स्कैन या एमआरआई कराकर कारण का पता लगाना आवश्यक है, ताकि मरीज को समय पर उचित उपचार मिल सके।

Chief Editor, Aaj Khabar
