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Haldwani: गुरु विरजानंद दांडी स्मृति यज्ञशाला का हुआ लोकार्पण, यज्ञ को बताया वैज्ञानिक और जनकल्याणकारी परंपरा

Haldwani: गुरु विरजानंद दांडी स्मृति यज्ञशाला का हुआ लोकार्पण, यज्ञ को बताया वैज्ञानिक और जनकल्याणकारी परंपरा
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Haldwani: हल्द्वानी में आर्य समाज परिसर में गुरु विरजानंद दांडी स्मृति यज्ञशाला का लोकार्पण रविवार को धार्मिक एवं वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड के प्रसिद्ध संत स्वामी गुरुकुलानंद सरस्वती (कच्चाहरी बाबा) ने यज्ञशाला का लोकार्पण किया और विशेष यज्ञ में सहभागिता निभाई।

मुख्य अतिथि स्वामी गुरुकुलानंद सरस्वती ने कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से अनेक रोगों के उपचार और वातावरण की शुद्धि में भी लाभ मिलता है। उन्होंने अपने चिकित्सा अधिकारी के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने गंभीर बीमारियों के उपचार में भी यज्ञ के सकारात्मक परिणाम देखे हैं। उन्होंने यज्ञ के वैज्ञानिक महत्व को विश्वभर में प्रचारित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

आर्य समाज हल्द्वानी की स्थापना वर्ष 1891 में हुई थी और तब से संस्था सामाजिक, शैक्षणिक एवं वैदिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। नवनिर्मित यज्ञशाला में प्रो. विनय विद्यालंकार के ब्रह्मत्व में विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों ने सपत्नीक यजमान बनकर आहुतियां अर्पित कीं।

कार्यक्रम में उत्तराखंड प्रांतीय आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष सुधीर गुलाटी, मंत्री मयंक गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी भाग लिया। इस अवसर पर प्रांतीय सभा की बैठक आयोजित की गई, जिसमें आर्य समाज के विस्तार और सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाने को लेकर विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए संगठन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया।

इस अवसर पर डॉ. विनय खुल्लर, उद्योगपति एवं सीए नीरज शारदा, भूमेश अग्रवाल, राजीव आर्य, रणजीत यादव, अमित भारद्वाज, कर्नल निर्मल पांडेय, अनुजकांत खंडेलवाल, कृष्णकांत अग्रवाल, हरिशचंद्र पंत सहित बड़ी संख्या में समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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