Haldwani: उप कारागार हल्द्वानी में निरुद्ध कैदियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने की दिशा में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल की गई है। विश्वविद्यालय के हल्द्वानी क्षेत्रीय केंद्र के अंतर्गत उप कारागार परिसर में कैदियों के लिए विशेष अध्ययन केंद्र की स्थापना की गई है, जिससे अब जेल में रहते हुए भी कैदी उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।
इसी क्रम में उप कारागार हल्द्वानी में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय एवं कारागार प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के निदेशक क्षेत्रीय सेवाएं प्रो. गिरिजा पाण्डे, उपनिदेशक प्रो. एम.एम. जोशी, सहायक क्षेत्रीय निदेशक रेखा बिष्ट सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
प्रो. गिरिजा पाण्डे ने कहा कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय का उद्देश्य प्रदेश के सुदूर, वंचित और उपेक्षित वर्गों तक उच्च शिक्षा पहुंचाना है। इसी सोच के तहत अब जेल में बंद कैदियों को भी शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी और समाज में पुनर्वास के उनके प्रयासों को मजबूती देगी।
डिप्टी जेलर अमित कुमार ने इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और उपेक्षित वर्ग तक उच्च शिक्षा पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है, जिसे विश्वविद्यालय ने गंभीरता से स्वीकार किया है। वहीं डिप्टी जेलर रचित बाउंटियल ने कहा कि इस प्रयास से कैदियों में सकारात्मक सोच विकसित होगी और उनके जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलेगा।
प्रो. एम.एम. जोशी ने विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय समाज के हर वर्ग तक उच्च शिक्षा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। कार्यक्रम का संचालन कर रहीं सहायक क्षेत्रीय निदेशक रेखा बिष्ट ने बताया कि इस विशेष अध्ययन केंद्र के माध्यम से कैदियों को विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में निःशुल्क प्रवेश दिया जा रहा है।
जेल अधीक्षक प्रमोद कुमार ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास कैदियों के पुनर्वास की दिशा में एक मजबूत कदम है। कार्यक्रम में कारागार के अधिकारी, कर्मचारी, विश्वविद्यालय प्रतिनिधि और शिक्षा में रुचि रखने वाले कैदी उपस्थित रहे। कैदियों में इस पहल को लेकर उत्साह और नई आशा देखने को मिली।

Chief Editor, Aaj Khabar
