International News: मिडिल ईस्ट में ईरान को लेकर बढ़ते युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता की आशंका के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका ने भारतीय रिफाइनर कंपनियों को समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दे दी है।
अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित होने से बचाने के लिए उठाया गया है। उन्होंने बताया कि वित्त विभाग ने भारतीय रिफाइनर कंपनियों को उन रूसी तेल कार्गो की खरीद की अनुमति दी है, जो पहले से समुद्र में मौजूद हैं और जिनकी डिलीवरी की प्रक्रिया चल रही है।
स्कॉट बेसेंट ने अपने बयान में कहा कि वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बनाए रखने के लिए यह अस्थायी छूट दी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल पहले से समुद्र में मौजूद कार्गो से जुड़े ट्रांजैक्शन तक सीमित है, इसलिए इससे रूस को कोई विशेष वित्तीय लाभ नहीं होगा।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका को उम्मीद है कि भारत भविष्य में अमेरिकी कच्चे तेल की खरीद को बढ़ाएगा। उनके अनुसार भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय रिफाइनर कंपनियों ने वैकल्पिक सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए तेजी से रूसी कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, भारत की सरकारी रिफाइनर कंपनियां मार्च और अप्रैल की शुरुआत में भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने वाले रूसी तेल कार्गो के लिए ट्रेडर्स से लगातार बातचीत कर रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रिफाइनर कंपनियां अब तक करीब 20 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल खरीद चुकी हैं। बाजार में सीमित उपलब्धता के कारण रूस के यूराल्स क्रूड ऑयल की कीमतें भी बढ़ गई हैं। ट्रेडर्स भारतीय खरीदारों को यह तेल ब्रेंट क्रूड के मुकाबले 4 से 5 डॉलर प्रति बैरल प्रीमियम पर ऑफर कर रहे हैं, जबकि फरवरी में यही कार्गो लगभग 13 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर बिक रहा था।
युद्ध शुरू होने से पहले 28 फरवरी को हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने भी डिस्काउंटेड कीमत पर दो रूसी तेल कार्गो खरीदे थे। बाजार के जानकारों का कहना है कि मौजूदा हालात में कीमत से ज्यादा तेल की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन गई है।

Chief Editor, Aaj Khabar
