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Nainital: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किए कैंची धाम के दर्शन, नैनीताल में वन पंचायतों को बताया लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी

Nainital: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किए कैंची धाम के दर्शन, नैनीताल में वन पंचायतों को बताया लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी
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Nainital: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अपने उत्तराखंड दौरे के दौरान आध्यात्मिक और प्रशासनिक गतिविधियों के केंद्र में रहे। उन्होंने नैनीताल स्थित डॉ. रघुनंदन सिंह टोलिया प्रशासनिक अकादमी में आयोजित संवाद कार्यक्रम में भाग लेते हुए वन पंचायत प्रतिनिधियों, त्रिस्तरीय पंचायतों और शहरी निकायों के निर्वाचित सदस्यों को संबोधित किया।

इस दौरान बिरला ने सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और जनसहभागिता को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए जनभागीदारी और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

अपने प्रवास के दौरान उन्होंने कैंची धाम पहुंचकर दर्शन भी किए। उन्होंने इसे दिव्य ऊर्जा, शांति और आध्यात्मिक संतुलन का अद्भुत केंद्र बताते हुए कहा कि यहां का वातावरण और भक्ति का स्पंदन मन को भीतर तक छू जाता है।

संवाद कार्यक्रम में बिरला ने उत्तराखंड की वन पंचायतों को सामुदायिक भागीदारी आधारित वन प्रबंधन का सफल मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था न केवल वन संरक्षण में सहायक है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती देती है।

उन्होंने वन पंचायतों को लोकतंत्र की सबसे सशक्त कड़ी बताते हुए कहा कि जमीनी संस्थाएं सुशासन और पर्यावरण संरक्षण में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। बिरला ने जल, जंगल और जमीन के संतुलन को मानव जीवन और प्रकृति के लिए अनिवार्य बताते हुए इनके संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताया।

उत्तराखंड की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्य मानव और प्रकृति के सह-अस्तित्व का जीवंत उदाहरण है। साथ ही उन्होंने औपनिवेशिक काल से चले आ रहे वन संरक्षण आंदोलनों और नीतिगत प्रयासों का उल्लेख करते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया।

बिरला ने वन पंचायतों के सहयोग से औषधीय पौधों के संरक्षण, शोध और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली से एकीकरण के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाने का सुझाव भी दिया। उन्होंने वनाग्नि जैसी चुनौतियों से निपटने में स्थानीय समुदायों के अनुभवजन्य ज्ञान को बेहद महत्वपूर्ण बताया और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।

संवाद के दौरान विभिन्न प्रतिनिधियों ने वनाग्नि नियंत्रण, वित्तीय सहायता, तकनीकी सहयोग और पंचायतों के अधिकारों के विस्तार से जुड़े मुद्दे उठाए, जिस पर बिरला ने उनके सुझावों को केंद्र स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

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