Rudrapur: विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की अध्यक्षता में आयोजित बैठक सोमवार को राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई। मतदाता सूची में दर्ज आपत्तियों, कथित दोहरे मतों और संदिग्ध प्रविष्टियों को लेकर भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विवाद बढ़ने के बाद भाजपा विधायक शिव अरोड़ा, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, भाजपा जिलाध्यक्ष कमल जिंदल समेत कई पदाधिकारी कलेक्ट्रेट कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए और कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की।
पूर्व भाजपा विधायक राजेश शुक्ला ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में आपत्ति दर्ज कराने वाले कुछ लोगों को कथित रूप से फोन पर धमकियां दी जा रही हैं और उनके घरों तक जाकर आपत्तियां वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आपत्ति दर्ज कराना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसकी निष्पक्ष जांच चुनाव आयोग व प्रशासन द्वारा की जानी चाहिए।
शुक्ला के अनुसार, बैठक में आपत्तिकर्ताओं को धमकाए जाने का मुद्दा उठाने पर कांग्रेस के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के साथ तीखी बहस हुई। उन्होंने बैठक के दौरान अभद्र भाषा और धमकी दिए जाने के आरोप भी लगाए, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
वहीं पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने भाजपा नेताओं के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जो लोग पहले बैठकों में नहीं आए, वे अब दबाव बनाने के लिए अभद्रता कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बात की जाएगी, उसी तरह जवाब दिया जाएगा और आपत्ति दर्ज कराने वाले लोगों को किसी राजनीतिक दल से जोड़ना उचित नहीं है।
रुद्रपुर विधायक शिव अरोड़ा ने कहा कि बैठक नियमानुसार चल रही थी और मतदाता सूची पर आपत्ति दर्ज कराना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपत्तिकर्ताओं के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग और प्रशासन जांच करेगा और यदि कोई मतदाता प्रविष्टि नियमों के विपरीत पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई होगी।
विवाद के बाद भाजपा नेताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना देकर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कार्रवाई और आपत्तिकर्ताओं को कथित धमकी देने के मामलों की जांच की मांग की। अब पूरे मामले में प्रशासन और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

Chief Editor, Aaj Khabar
