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Uttarakhand: “जहां हर मोड़ पर शिव का अहसास”, आदि कैलाश यात्रा 2026 बनी आस्था और प्रकृति का दिव्य संगम

Uttarakhand: “जहां हर मोड़ पर शिव का अहसास”, आदि कैलाश यात्रा 2026 बनी आस्था और प्रकृति का दिव्य संगम
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० धारचूला से जोलिंगकोंग तक अब पहले से सुगम हुआ सफर

० बीआरओ की सड़कों ने बदली तस्वीर, श्रद्धालुओं को मिला आध्यात्मिक अनुभव

० ओम पर्वत से आदि कैलाश तक दर्शन यात्रा में बढ़ा उत्साह
पत्रकारों ने कहा- ‘यह अनुभव शब्दों से परे है’

Uttarakhand: सीमांत उत्तराखंड में स्थित पवित्र आदि कैलाश यात्रा इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए पहले से कहीं अधिक सुगम, सुरक्षित और आध्यात्मिक अनुभव के रूप में उभर रही है। काली नदी के किनारे बसे धारचूला से शुरू होने वाला यह सफर अब केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा को भीतर तक छू लेने वाला दिव्य अनुभव बन गया है।
सुबह की हल्की धूप, पहाड़ों से आती ठंडी हवा और काली नदी का साथ यात्रा की शुरुआत को ही आध्यात्मिक बना देता है। पांगला तक पहुंचते-पहुंचते रास्ते संकरे और रोमांचक हो जाते हैं। पांगला , गर्ब्यांग, गूंजी, नाभी के बीच बहते झरने, गूंजती हवाएं और गहरी खाइयां इस पूरे सफर को अविस्मरणीय बना देती हैं।

नाभी स्थित आईटीबीपी चेकपोस्ट पर परमिट जांच के बाद यात्रा और भी विशेष हो जाती है। यहां से श्रद्धालुओं को भव्य ओम पर्वत के स्पष्ट दर्शन होते हैं, जिसे देखकर हर यात्री भावविभोर हो उठता है। इसके बाद कुटी घाटी की ओर बढ़ते हुए कुटी गांव आता है, जो इस क्षेत्र का अंतिम बसा हुआ गांव है, जहां लोगों की सादगी और मेहमाननवाजी यात्रियों को गहराई से प्रभावित करती है।

जोलिंगकोंग की ओर बढ़ते हुए जैसे ही बर्फ से ढके पर्वत सामने आते हैं, पूरा वातावरण बदल जाता है। और फिर सामने प्रकट होता है भव्य आदि कैलाशकृबर्फ से आच्छादित यह पर्वत मानो स्वयं भगवान शिव का स्वरूप प्रतीत होता है। इसके समीप स्थित पार्वती सरोवर की शांति उस क्षण को और भी अलौकिक बना देती है, जहां पहुंचकर समय जैसे ठहर जाता है।
इस वर्ष यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता बेहतर कनेक्टिविटी है। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) द्वारा कुँजी से कुटी तक बनाई गई सड़कें यात्रा को काफी आसान बना रही हैं। हालांकि धारचूला से कुँजी तक कुछ हिस्सों में अभी भी चुनौतियां हैं, लेकिन आगे का पूरा मार्ग सुगम और सुरक्षित हो गया है। आदि कैलाश यात्रा 1 मई 2026 से आम श्रद्धालुओं के लिए शुरू होगी। इसके लिए धारचूला से आगे जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से परमिट लेना अनिवार्य है। यात्रा से पहले पत्रकारों को इस पवित्र धाम के दर्शन का अवसर मिला, जिन्होंने इसे “अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत” बताया। दैनिक आज खबर के चीफ एडिटर एवं एनयूजे(आई) कुमाऊं मंडल अध्यक्ष दिनेश जोशी ने कहा कि यहां पहुंचकर मन को गहरी आध्यात्मिक संतुष्टि प्राप्त होती है।

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आदि कैलाश की भव्य हिमालयी पृष्ठभूमि में खड़े दैनिक आज के उत्तराखंड प्रभारी दिनेश जोशी

करीब 5,945 मीटर की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश, जिसे ‘छोटा कैलाश’ भी कहा जाता है, सदियों से धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। पार्वती कुंड और ओम पर्वत इस क्षेत्र की आस्था को और मजबूत करते हैं। आदि कैलाश स्थित शिव मंदिर के कपाट आज बी आर ओ के कमान अधिकारी की मौजूदगी में पूजा अर्चना कर खोले गये, 1 मई से शुरू होने वाली कैलाश यात्रा 2026 अब आस्था, रोमांच और आत्मिक शांति का अद्भुत संगम बनेगी ऐसी आशा करते हैं।

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