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Haldwani: कुमाऊं आयुक्त की अध्यक्षता में हल्द्वानी समेत कुमाऊं के 7 शहरों में जलभराव से राहत की उम्मीद, 430 करोड़ के मास्टर ड्रेनेज प्लान को मिली संस्तुति

Haldwani: कुमाऊं आयुक्त की अध्यक्षता में हल्द्वानी समेत कुमाऊं के 7 शहरों में जलभराव से राहत की उम्मीद, 430 करोड़ के मास्टर ड्रेनेज प्लान को मिली संस्तुति
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Haldwani: कुमाऊं मंडल के शहरी क्षेत्रों में वर्षाकाल के दौरान होने वाली जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। हल्द्वानी शहर के प्रमुख नालों—कलसिया, चीनपुर, पनियाली, वनचौकी, रकसिया और देवखड़ी—में जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक कार्य योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।

उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी (यूयूएसडीए) द्वारा 362 करोड़ रुपये की लागत से शहर में ड्रेनेज कार्य प्रगति पर हैं, जबकि शेष कार्यों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार सिंचाई विभाग ने 430 करोड़ रुपये का विस्तृत ड्रेनेज प्लान तैयार किया है। इस प्लान को सोमवार को कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत की अध्यक्षता में गठित समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां समीक्षा के बाद इसे संस्तुति प्रदान कर शासन को भेजने का निर्णय लिया गया।

बैठक में नगर के ड्रेनेज नेटवर्क के निर्माण और सुधार को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नालों के आसपास हुए अतिक्रमणों को चिन्हित कर तत्काल हटाया जाए, ताकि जल निकासी बाधित न हो। साथ ही वर्षाकाल में नालों के चोक होने की समस्या से निपटने के लिए विशेष टीम गठित करने के निर्देश भी दिए गए।

यूयूएसडीए के अधिकारियों ने बताया कि रकसिया नाले का आउटफॉल कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, जबकि अन्य कार्य तेजी से जारी हैं। वहीं सिंचाई विभाग द्वारा तैयार डीपीआर के तहत हल्द्वानी शहर को 7 जोनों में बांटकर वैज्ञानिक तरीके से जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के नालों को जोड़कर उनके आउटफॉल तय किए गए हैं, जिससे जलभराव की समस्या में स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।

इसी क्रम में कुमाऊं मंडल के अन्य शहरों—पिथौरागढ़, टनकपुर, बनबसा, कपकोट, गरुड़ और बागेश्वर—के लिए भी मास्टर ड्रेनेज प्लान को समिति द्वारा मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं के तहत शहरवार नालों की लंबाई, लागत और जल निकासी के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं के लागू होने से न केवल जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी, बल्कि भू-कटाव और अनियंत्रित जल प्रवाह जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा। साथ ही नालों की शत-प्रतिशत कनेक्टिविटी सुनिश्चित कर दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

सरकार की इस पहल से कुमाऊं के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने के साथ ही लोगों को हर वर्ष होने वाली जलभराव की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।

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