Uttarakhand: उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राज्य सरकार पर त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों में पर्वतीय क्षेत्रों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार की परिसीमन नीति के कारण पर्वतीय जिलों में पंचायतों के हर स्तर पर सीटों की संख्या घट रही है या स्थिर बनी हुई है।
श्री आर्य ने कहा कि सरकार ने हाल ही में जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत सीटों के परिसीमन के आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में 24,000 की जनसंख्या पर दो जिला पंचायत सीटें निर्धारित की गई हैं, जबकि मैदानी क्षेत्रों में 50,000 की जनसंख्या पर यही व्यवस्था लागू की गई है। इससे कई पर्वतीय विकासखंडों में जिला पंचायत सदस्यों की संख्या घट गई है या अपरिवर्तित रही है।
उन्होंने कहा, “पर्वतीय क्षेत्रों में 12,000 की जनसंख्या एक विशाल और विकट भौगोलिक क्षेत्र को कवर करती है। ऐसे क्षेत्रों में न तो विकास कार्य सुचारू रूप से हो पाते हैं और न ही पंचायत प्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन कर पाते हैं।”
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि शहरी क्षेत्रों में परिसीमन कर कई नगरीय पंचायतों का दर्जा बढ़ाया गया है और वार्डों की संख्या में भी इजाफा किया गया है। इसके विपरीत ग्रामीण क्षेत्रों की पंचायतों में सीटों की संख्या नहीं बढ़ाई जा रही है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
श्री आर्य ने मांग की कि पर्वतीय जिलों में विकास सुनिश्चित करने के लिए 8,000 से 10,000 की जनसंख्या पर एक जिला पंचायत सीट का गठन किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से ग्रामीण क्षेत्रों को पंचायतों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की अपील की ताकि विकास कार्यों की गति बनी रहे।
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Chief Editor, Aaj Khabar
