Uttarakhand: उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने वैश्विक आध्यात्मिक गुरु गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में भेंट की। यह अवसर विशेष रहा क्योंकि संस्था अपने 45वें स्थापना वर्ष में प्रवेश कर रही है।
राज्यपाल का आश्रम परिसर में आत्मीय स्वागत किया गया, जिसके बाद उन्होंने प्रतिष्ठित एम्फीथिएटर में आयोजित विशेष सत्संग में सहभागिता की। इस दौरान उन्होंने आश्रम के विशाल हरित परिसर का अवलोकन किया और अत्याधुनिक गौशाला का दौरा भी किया, जो देशी नस्लों के संरक्षण और सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती है।
अपने संबोधन में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने संस्कृत और कंप्यूटर विज्ञान के बीच समानता का उल्लेख करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य में ‘परम बुद्धिमत्ता’ और आगे ‘ब्रह्मांडीय बुद्धिमत्ता’ की दिशा में विकसित होगी। उन्होंने वैश्विक शांति की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आज भी दुनिया को अधिक शांतिपूर्ण बनने की आवश्यकता है। अपने उद्बोधन का समापन उन्होंने शांति मंत्र के साथ किया और मानवता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी को रेखांकित किया।
वर्ष 1981 में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर द्वारा स्थापित आर्ट ऑफ लिविंग आज विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक बन चुका है। ध्यान, प्राणायाम, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, आपदा राहत और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में कार्य करते हुए संस्था 182 देशों में 80 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बना चुकी है।
45वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में इंटरनेशनल सेंटर में एक भव्य ध्यान मंदिर के उद्घाटन की तैयारियां चल रही हैं, जिसे विश्व के सबसे बड़े ध्यान स्थलों में शामिल करने की योजना है। यह केंद्र दुनियाभर के साधकों के लिए शांति, संतुलन और आत्मिक विकास का प्रमुख केंद्र बनेगा।
उत्तराखंड में भी संस्था की सक्रिय भूमिका देखने को मिली है। वर्ष 2013 की आपदा और 2025 की फ्लैश फ्लड्स के दौरान स्वयंसेवकों ने राहत कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा, हिमालयी क्षेत्रों में वृक्षारोपण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों लोगों को लाभ पहुंचाया गया है।
रुद्रप्रयाग जिले में महिला किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती को अपनाने से जहां लागत में कमी आई है, वहीं मिट्टी की उर्वरता और आय में भी वृद्धि दर्ज की गई है। देशभर में संस्था 1,327 निःशुल्क विद्यालयों का संचालन कर रही है, जिससे 1.2 लाख से अधिक बच्चों को शिक्षा मिल रही है, जबकि नदी पुनर्जीवन अभियानों से करोड़ों लोगों को लाभ मिला है।
इस अवसर पर आयोजित विशेष सत्संग ने गुरुदेव के उस संदेश को पुनः स्थापित किया कि स्थायी सामाजिक परिवर्तन का आधार व्यक्ति की आंतरिक शांति है।

Chief Editor, Aaj Khabar
