Uttarakhand: PGI Con Prithvi 2025 के दूसरे दिन WHO से जुड़े डॉक्टर KM (डॉ. किम) ने कहा कि स्वास्थ्य और कल्याण के उच्चतम मानक प्राप्त करने के लिए साक्ष्य-आधारित TEC-IM का योगदान बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में स्ट्रोक, रेस्पिरेटरी सिस्टम और हेपाटो-बिलियरी सिस्टम पर केंद्रित पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं।
स्ट्रोक पैनल में BHU के आयुर्वेद विशेषज्ञ प्रो. डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि यदि लंबे समय तक सीने में जलन बनी रहे तो इससे उच्च रक्तचाप बढ़ सकता है, जो आगे चलकर स्ट्रोक का कारण बन सकता है। उच्च रक्तचाप में आयुर्वेदिक औषधि पुनर्नवा मंडूर का प्रभावी उपयोग किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रोक होने के एक वर्ष के भीतर यदि आयुर्वेदिक चिकित्सा जैसे पंचकर्म, शिरोधरा और बस्ती कराई जाए तो रोगी को उल्लेखनीय लाभ मिलता है।
होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. कामत ने कहा कि स्ट्रोक का एक प्रमुख कारण रक्त प्रवाह में अचानक गिरावट यानी वॉटरफॉल इफेक्ट भी हो सकता है। AIIMS रायपुर की डॉ. अंजली पाल ने बताया कि जीवनशैली बदलाव और प्राण-कोष्ठ संतुलन से स्ट्रोक से बचाव संभव है। इस चर्चा के चेयरमैन डॉ. पतंजलि देव दयर और मॉडरेटर डॉ. पी.एस. भंडारी थे।
रेस्पिरेटरी सिस्टम पर हुए पैनल में प्रो. डॉ. विनय खुल्लर और डॉ. परिणीति जोशी ने अध्यक्षता की। चर्चा में रिषि गुल कॉलेज के प्रो. डॉ. संजय सिंह ने बताया कि अस्थमा में वासा और पुष्करमूल जैसी आयुर्वेदिक औषधियां अत्यंत लाभकारी हैं। होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. दीपक शर्मा ने कहा कि रोगी के व्यवहार और लक्षणों के आधार पर उपचार किया जाना चाहिए और प्राणायाम श्वसन तंत्र को मजबूत बनाता है। डॉ. विनय खुल्लर ने कहा कि सही दिनचर्या और नियमित व्यायाम से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और श्वसन संबंधी व्याधियों से बचाव होता है।
हेपाटो-बिलियरी सिस्टम पर चर्चा में चेयरपर्सन डॉ. विनोद जोशी और मॉडरेटर सर्जन डॉ. तरुण कुमार उपस्थित रहे। होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. श्रीपद हेगड़े ने बताया कि पित्त की पथरी में 2–3 महीनों तक परहेज और उचित होम्योपैथिक दवाओं के प्रयोग से पथरी को घोलकर निकाला जा सकता है। डॉ. विनोद जोशी ने कहा कि श्वेत पर्पटी और शूल शेखर रस का उपयोग लक्षणों में राहत देने में प्रभावी है

Chief Editor, Aaj Khabar
