Rudraprayag: केदारनाथ धाम पैदल मार्ग पर पोल संख्या 98 और 99 के बीच पहाड़ी से अचानक बोल्डर और पत्थर गिरने के कारण मार्ग का एक हिस्सा दो दिन बाद भी अवरुद्ध है। सुरक्षा के मद्देनज़र प्रशासन ने एहतियातन घोड़ा, डंडी एवं कंडी सेवा को अस्थायी रूप से रोक दिया है। हालांकि प्रशासन की निगरानी में पैदल यात्रियों की आवाजाही सुचारु रूप से जारी है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि 17 जुलाई को घटना की सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंच गया था। यात्रियों की सुरक्षा के लिए घटनास्थल पर डीडीआरएफ, पुलिस चौकी जंगलचट्टी और एमटीएफ भीमबली की टीमें तैनात हैं। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
लोक निर्माण विभाग गुप्तकाशी निर्माण खंड के कनिष्ठ अभियंता के अनुसार मार्ग को जल्द बहाल करने के लिए 14 श्रमिक मलबा हटाने में जुटे हैं। युद्धस्तर पर राहत एवं बहाली कार्य जारी है ताकि मार्ग को जल्द से जल्द पूरी तरह चालू किया जा सके।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मौसम और सुरक्षा की समीक्षा के बाद ही घोड़ा, डंडी एवं कंडी सेवा दोबारा शुरू की जाएगी। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे यात्रा के दौरान सतर्क रहें, अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
इधर, मॉनसून के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने और सड़क मार्गों को हर हाल में सुचारु बनाए रखने के लिए रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के निर्देश पर भूस्खलन, मलबा आने, पेड़ गिरने और अन्य प्राकृतिक बाधाओं से तत्काल निपटने के लिए संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी मशीनें, मानव बल और विभागीय टीमें पहले से तैनात कर दी गई हैं।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता संजीव कुमार सैनी ने बताया कि जिले के भूस्खलन संभावित 17 संवेदनशील स्थलों पर जेसीबी मशीनें तैनात हैं। इनमें रुद्रप्रयाग मुख्यालय, स्यालसू, खांकरा, गोर्ती, तैला बैण्ड, छेनागाड़, घेंघड़खाल, रैंतोली, रणधार, काण्डई, चोपता, जैली, रतनपुर बैण्ड, चोपड़ा, बेडूबगड़, नगरासू और जवाड़ी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि सड़क अवरुद्ध होने, भूस्खलन या पेड़ गिरने जैसी किसी भी घटना की सूचना मिलते ही संबंधित टीमें 10 से 30 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचकर राहत एवं मार्ग बहाली का कार्य शुरू करें।
संजीव कुमार सैनी के अनुसार पिछले दो दिनों की बारिश के दौरान कई स्थानों पर सड़क पर पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं, लेकिन विभागीय टीमों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर मार्गों को शीघ्र यातायात के लिए बहाल कराया।
जिला प्रशासन ने कहा है कि मॉनसून अवधि में सभी संवेदनशील क्षेत्रों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मशीनरी, संसाधन और मानव बल पूरी तरह तैयार हैं, ताकि चारधाम यात्रा, स्थानीय जनजीवन और राहत एवं बचाव कार्य सुरक्षित एवं निर्बाध रूप से संचालित होते रहें।

Chief Editor, Aaj Khabar
