New Delhi: पतंजलि का नया विज्ञापन ‘चलो, धोखा खाओ!’ अब कानूनी मुसीबत में फंस गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने बाबा रामदेव की आवाज़ में प्रसारित इस एड को भ्रामक और प्रतिस्पर्धियों को नीचा दिखाने वाला बताते हुए 72 घंटे के भीतर सभी प्लेटफॉर्म्स से हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि किसी उत्पाद की तुलना तो की जा सकती है, लेकिन दूसरे ब्रांड्स को ‘धोखा’ कहना अनुचित और अवैध है।
यह आदेश 6 नवंबर 2025 को जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने दिया, जिसे बुधवार को सार्वजनिक किया गया। अदालत ने कहा कि ऐसा विज्ञापन अनुचित प्रतिस्पर्धा और व्यावसायिक आचार संहिता का उल्लंघन है।
डाबर की शिकायत से मामला शुरू
डाबर इंडिया, जो च्यवनप्राश मार्केट में लगभग 60% हिस्सेदारी रखता है, ने पतंजलि के इस एड को “कॉमर्शियल डिस्पैरेजमेंट” बताते हुए कोर्ट में याचिका दायर की थी। डाबर ने कहा कि पतंजलि का “चलो, धोखा खाओ!” विज्ञापन न केवल उनके उत्पाद को नुकसान पहुंचा रहा है बल्कि पूरी च्यवनप्राश कैटेगरी की विश्वसनीयता को ठेस पहुँचा रहा है।
कोर्ट ने माना कि बाबा रामदेव की यह लाइन “अधिकांश लोग च्यवनप्राश के नाम पर धोखा खा रहे हैं” सीधे तौर पर प्रतिस्पर्धियों को कमतर बताती है, जो कानूनन गलत है।
फरवरी 2026 तक जारी रहेगी रोक
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि पतंजलि फरवरी 2026 तक कोई नया ऐसा विज्ञापन नहीं चला सकेगी जो किसी अन्य ब्रांड या कंपनी को बदनाम करे। अगली सुनवाई 26 फरवरी 2026 को होगी।
पहले भी हो चुकी है टक्कर
यह पहली बार नहीं है जब पतंजलि और डाबर आमने-सामने आए हों। जुलाई 2025 में भी पतंजलि के एक च्यवनप्राश विज्ञापन पर कोर्ट ने रोक लगाई थी, जिसमें अन्य ब्रांड्स को “साधारण” और “आयुर्वेद से दूर” बताया गया था।
भ्रामक विज्ञापनों पर पहले भी चेतावनी
पतंजलि के खिलाफ पहले भी कई बार अदालतों ने सख्ती दिखाई है—
- 2022: IMA ने सुप्रीम कोर्ट में पतंजलि पर कोविड इलाज के झूठे दावों का आरोप लगाया।
- 2023: सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाई।
- 2024: बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को कोर्ट ने व्यक्तिगत रूप से बुलाया, बाद में माफी मांगने पर मामला बंद हुआ।
मार्केटिंग की आज़ादी पर नई बहस
इस केस ने अब एक नई बहस छेड़ दी है—क्या विज्ञापन स्वतंत्रता की कोई सीमा होनी चाहिए? अदालत ने साफ कहा कि प्रचार की स्वतंत्रता वहीं तक है, जहाँ किसी की प्रतिष्ठा को ठेस न पहुँचे। यह फैसला आने वाले विज्ञापन अभियानों के लिए एक अहम मिसाल बन सकता है।

Chief Editor, Aaj Khabar
