Dehradun: पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने देहरादून में अपने सहयोगी के ठिकाने से भारी मात्रा में कैश और ज्वैलरी बरामद होने की सामने आई खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। हरीश रावत ने अपनी फेसबुक पोस्ट के जरिए पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि बरामदगी से जुड़े वास्तविक तथ्य आने वाले समय में सामने आएंगे।
रावत ने कहा कि श्री जीना उनके ओएसडी रह चुके हैं और वह पार्टी तथा सरकार में उनके अलग-अलग कार्यकालों के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं। उन्होंने जीना को बेहद सज्जन, विनम्र और काम करने वाला व्यक्ति बताते हुए कहा कि यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ या इस तरह की कोई गलती उनके द्वारा की गई है और उसके प्रमाण मौजूद हैं तो वह ऐसे कृत्य के लिए लज्जित हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें फिलहाल इस आरोप पर बिल्कुल विश्वास नहीं है।
रावत ने अपनी फेसबुक पोस्ट में कहा कि उत्तराखंड के चुनाव में इस समय भारी राजनीतिक दांव लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि वह पहले मजाक में कहा करते थे कि चुनाव तब होंगे, जब सीबीआई उनके दरवाजे पर दस्तक देने आएगी। इस बार उनके घर के बजाय उनके एक सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक नैरेटिव बनाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लामबंद होकर लड़ रहे हैं। ऐसे समय में उनके किसी भी कृत्य से पार्टी के संघर्ष में कमजोरी नहीं आनी चाहिए। इसी को देखते हुए रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने की इच्छा जाहिर की है।
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को लेकर रावत ने कहा कि इसका गठन राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए किया गया था। उन्होंने दावा किया कि उनके करीब तीन साल के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां हुईं। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में लोक सेवा आयोग को समय पर परीक्षाएं कराने के लिए बाध्य किया गया और विभिन्न विभागों में भर्ती के लिए अलग-अलग बोर्ड भी बनाए गए।
रावत ने कहा कि यदि उस प्रक्रिया के दौरान नियुक्तियों में उनसे कोई ‘एरर ऑफ जजमेंट’ हुआ है तो वह इसके लिए उत्तराखंड की जनता से क्षमा मांगते हैं। उन्होंने बताया कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी। रावत के मुताबिक, इस नियुक्ति को लेकर उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी से भी प्रभावी सलाह मिली थी।
उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति भविष्य में किस तरह की गलती करेगा, यह पहले से कोई नहीं जान सकता। रावत ने कहा कि नियुक्तियों और परीक्षाओं में गड़बड़ी राज्य की आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। यदि जाने-अनजाने में उनसे कोई ऐसी चूक हुई है, जिससे राज्य के युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है तो वह स्वयं को दंड का पात्र मानते हैं और इसके लिए जनता से क्षमा मांगते हैं।
हरीश रावत ने सार्वजनिक अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास भर्ती मामलों में उनके हस्तक्षेप या संलिप्तता से जुड़े कोई प्रमाण हैं तो उन्हें सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उनसे कोई ऐसी चूक हुई है तो कानून को उन्हें दंडित करना चाहिए।

Chief Editor, Aaj Khabar
