Dehradun: पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में उपनल कर्मचारियों के लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे पर बड़ा निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने उपनल कर्मियों को समान कार्य समान वेतन देने पर सहमति जताई है, जिसका लाभ चरणबद्ध तरीके से कर्मचारियों को मिलेगा।
बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) के अंतर्गत 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतन का लाभ मिलेगा। इस फैसले से उपनल के लगभग सात हजार कर्मचारियों को सीधा फायदा होगा। इसके साथ ही अब आगे से केवल भूतपूर्व सैनिकों के परिजनों को ही उपनल के माध्यम से रोजगार दिया जाएगा।
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि मुख्यमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि उपनल कर्मचारियों के साथ न्याय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने यह निर्णय लिया है कि वर्ष 2015 तक नियुक्त उपनल कर्मचारियों को शासनादेश जारी होने के बाद तत्काल प्रभाव से समान कार्य समान वेतन दिया जाएगा और उन्हें विभागीय संविदा में नहीं लिया जाएगा।
इसके बाद वर्ष 2016, 2017 और 2018 में नियुक्त कर्मचारियों को तीन चरणों में विभागीय संविदा में लेते हुए समान कार्य समान वेतन का लाभ दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2032 तक उपनल के सभी पात्र कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतन सुनिश्चित किया जाए।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी, लेकिन वहां भी सरकार को राहत नहीं मिली थी और याचिका खारिज कर दी गई थी।
इसके बाद उपनल कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका भी दायर की, जिससे सरकार पर निर्णय लेने का दबाव बढ़ गया था। कोर्ट के आदेशों के क्रम में गठित मंत्रिमंडलीय उप समिति की सिफारिशों के आधार पर आज कैबिनेट बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है, जिसे उपनल कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

Chief Editor, Aaj Khabar
