Dehradun: उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। देहरादून स्थित शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। जांच में सामने आया कि ‘मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ विषय का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले व्हाट्सएप और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से छात्रों तक पहुंचा दिया गया था। वहीं ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी’ विषय के प्रश्नपत्र की गोपनीयता पर भी गंभीर संदेह जताया गया।
मामले की पुष्टि होने के बाद विश्वविद्यालय ने दोनों विषयों की परीक्षाएं तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं। आरोपी सहायक प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता को अगले सात वर्षों तक विश्वविद्यालय की किसी भी परीक्षा एवं शैक्षणिक गतिविधि से प्रतिबंधित कर दिया गया है। दोनों विषयों की दोबारा परीक्षा अगस्त के तीसरे सप्ताह में आयोजित की जाएगी। नई परीक्षा तिथि विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जल्द जारी होगी।
यह पुनर्परीक्षा प्रदेश के 12 इंजीनियरिंग संस्थानों में आयोजित होगी, जिनमें बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड साइंसेज भीमताल, तुलाज इंस्टीट्यूट देहरादून, बीटीकेआईटी द्वाराहाट, रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, जयराम भाई पटेल इंस्टीट्यूट, माया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बाबा फरीद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, टीएचडीसी इंस्टीट्यूट टिहरी, नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग संस्थान पिथौरागढ़, वूमेन्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोपेश्वर शामिल हैं।
एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की शिकायत पर थाना प्रेमनगर में मुकदमा दर्ज किया गया है। विश्वविद्यालय की दो आंतरिक जांच रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गई हैं, जिनमें निष्कर्ष निकाला गया कि अनुचित लाभ कमाने के उद्देश्य से प्रश्नपत्र छात्रों तक पहुंचाए गए। इसके आधार पर आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
वहीं यूटीयू की कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में 22 छात्रों से जुड़े पेपर के लीक होने की पुष्टि हुई थी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित शिक्षक ने एक अन्य विषय का प्रश्नपत्र भी तैयार किया था, जिसकी परीक्षा में 355 छात्र शामिल हुए थे। शिक्षक की ईमानदारी संदेह के घेरे में होने के कारण विश्वविद्यालय ने एहतियातन वह परीक्षा भी रद्द कर दी। संबंधित कॉलेज को शिक्षक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस घटना ने उत्तराखंड की परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विश्वविद्यालय कौन से ठोस कदम उठाता है।

Chief Editor, Aaj Khabar
