Dehradun: देहरादून में 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर से पहुंचे ग्राम प्रधानों ने गुरुवार को सचिवालय कूच किया। बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान परेड ग्राउंड में एकत्रित हुए, जहां सभा के बाद जुलूस की शक्ल में सचिवालय की ओर रवाना हुए। पुलिस ने सचिवालय से पहले बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया।
अपनी मांगों को लेकर आक्रोशित ग्राम प्रधानों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और आगे बढ़ने लगे। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद नाराज ग्राम प्रधान सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की।
प्रदर्शन कर रहे ग्राम प्रधानों ने न्यूनतम 20 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की मांग उठाई। इसके अलावा वीबी-जी रामजी योजना में उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए श्रमिकों की उपस्थिति पूरी तरह ऑफलाइन करने की मांग की गई।
प्रधानों ने अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी 600 रुपये प्रतिदिन और कुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी 800 रुपये प्रतिदिन किए जाने की भी मांग रखी।
अल्मोड़ा के सल्ट से प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे ग्राम प्रधान अमित रावत ने कहा कि जिस गांव की मिट्टी से राजनीति का रास्ता निकलता है, उसी मिट्टी से जुड़े ग्राम प्रधानों को आज सड़क पर उतरकर आंदोलन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मनरेगा का नाम बदल दिया, लेकिन इसके साथ कई व्यवस्थाओं में भी बदलाव किए गए हैं।
अमित रावत ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या बनी रहती है। ऐसे में ग्राम सभा के श्रमिकों को ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में ही दो से तीन घंटे लग जाते हैं। इससे काम प्रभावित होने के साथ श्रमिकों को रोजगार मिलने में भी परेशानी हो रही है। उन्होंने उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए श्रमिकों की उपस्थिति ऑफलाइन किए जाने की मांग दोहराई।
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Chief Editor, Aaj Khabar
