Haldwani: कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर मनरेगा को कमजोर कर ग्रामीण गरीबों के संवैधानिक अधिकारों को समाप्त करने का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और विकेन्द्रित विकास की सोच का जीवंत प्रतीक है, जिसे मौजूदा सरकार ने “सुधार” के नाम पर खत्म करने का प्रयास किया है।
उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में बजट कटौती, राज्यों को समय पर धन न देना, जॉब कार्ड हटाना और आधार आधारित भुगतान जैसी शर्तों के जरिए करोड़ों मजदूरों को योजना से बाहर किया गया। परिणामस्वरूप, पिछले पांच वर्षों में मनरेगा के तहत औसतन 50–55 दिन ही रोजगार उपलब्ध हो सका, जो कानून की मूल भावना के विपरीत है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नया ढांचा मनरेगा को अधिकार आधारित योजना से हटाकर केंद्र-नियंत्रित, शर्तों पर आधारित स्कीम में बदल देता है। इससे न केवल राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जा रहा है, बल्कि ग्राम सभाओं और पंचायतों की भूमिका भी कमजोर की जा रही है। पार्टी का कहना है कि यह संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार है।
प्रेसवार्ता में नेशनल हेराल्ड प्रकरण का उल्लेख करते हुए कांग्रेस ने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ राजनीति से प्रेरित मामला अदालत में टिक नहीं सका, जिससे जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप एक बार फिर सामने आया है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए कहा कि सत्य की जीत हुई है और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
पार्टी नेताओं ने दो टूक कहा कि मनरेगा और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर किसी भी हमले का विरोध सड़क से लेकर संसद तक किया जाएगा। प्रेसवार्ता में स्थानीय एवं जिला स्तर के कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

Chief Editor, Aaj Khabar
